Ravindra K Dwivedi, National President Of Vishva Hindu Seva Sangh, Has Strongly Reacted To The Recent Statement

New Delhi/Mumbai: Ravindra K Dwivedi, National President of Vishva Hindu Seva Sangh, has strongly reacted to the recent statement made by Mohan Bhagwat, who said that Hindus and Muslims are one.

Dwivedi stated that Hindus and Muslims can never be the same as their ideologies are fundamentally different. He alleged that Muslims are “religion-driven” while Hindus are “spiritual,” and claimed that spiritual people do not harm others, whereas those driven by rigid belief systems may go to extreme lengths to enforce their views.

Questioning the stand of the Rashtriya Swayamsevak Sangh, Dwivedi asked that if Hindus and Muslims are indeed one, then why has the issue of Hindu-Muslim differences been raised across the country over the years.

He also criticized the RSS chief’s remark that the organisation would no longer participate in religious movements, stating that this indicates that the organisation’s focus has shifted from ideology to political power. Dwivedi alleged that such statements suggest that Hindus have been misled.

Referring to the current situation in the country, he appealed to the “upper caste community” to increase its population and unite people from all sections with dignity, stating that this is necessary for the protection of Sanatan.

Dwivedi also expressed concern over the present scenario under the leadership of Narendra Modi, alleging that unrest in the name of casteism and linguistic divisions is harmful for the nation.

He emphasized that there is no hierarchy in Sanatan and compared society to a vehicle with four wheels, stating that removing even one wheel would halt its movement. He further alleged that some leaders benefit from such divisions.

Dwivedi concluded by urging people to respect each other, focus on education and employment generation, and avoid blindly following political leaders.

Ravindra K Dwivedi, National President Of Vishva Hindu Seva Sangh, Has Strongly Reacted To The Recent Statement

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10th भारत इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल मुंबई 2025-26 में क्लासिक एंटरटेनमेंट के बेनर तले निर्मित फिल्म ‘अपना अमिताभ’ को बेस्ट फ़िल्म अवार्ड

फिल्म निर्माता विकास शर्मा  आइकॉनिक भारत गौरव पुरस्कार से सम्मानित

*मुंबई  : अंतरराष्ट्रीय स्तर कान्स फ़िल्म फैस्टिवल 2026 फ्रांस मैं फ़िल्म की स्क्रीनिंग होना हुआ तय ।

मुंबई में आयोजित भारत इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल 2025-26 में सिनेमा और सामाजिक सरोकारों को समर्पित फिल्मों को सम्मानित किया गया। इस प्रतिष्ठित समारोह में फिल्म ‘अपना अमिताभ’ को बेस्ट फ़िल्म कैटेगरी में अवार्ड प्रदान किया गया, वहीं सामाजिक मुद्दों पर सशक्त फिल्म निर्माण के लिए फिल्म निर्माता विकास शर्मा को आइकॉनिक भारत गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया

यह भव्य आयोजन 31 जनवरी को मुंबई स्थित मेयर हॉल, जुहू में संपन्न हुआ, जिसमें फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियों, निर्माता-निर्देशकों, कलाकारों और कला प्रेमियों की उपस्थिति रही।

सामाजिक सरोकारों पर आधारित सिनेमा को मिला सम्मान । फिल्म अपना अमिताभ को उसकी सशक्त कहानी, संवेदनशील प्रस्तुति और समाज से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से दर्शाने के लिए जूरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुना गया। फिल्म ने दर्शकों के साथ-साथ निर्णायक मंडल पर भी गहरी छाप छोड़ी।

वहीं फिल्म निर्माता विकास शर्मा को समाजिक मुद्दों को केंद्र में रखकर निरंतर सार्थक सिनेमा निर्माण के लिए  भारत गौरव पुरस्कार प्रदान किया गया जूरी ने उनके कार्य को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

समारोह में उमड़ा फिल्म जगत कार्यक्रम के दौरान फिल्म निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान पर भी चर्चा हुई। आयोजकों ने कहा कि भारत इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल का उद्देश्य नए और सार्थक सिनेमा को मंच देना है। और उसी कड़ी मैं फेस्टिवल के फाउंडर विक्रांत मोरे उन्होंने मंच से घोषणा की  इस वर्ष अपना अमिताभ  फ़िल्म  को कान्स मैं स्क्रीनिंग के लिए तय किया गया है जो कान्स फैस्टिवल के दोरान मई महीने मैं होगी l

फिल्म अपना अमिताभ और निर्माता विकास शर्मा को मिले इन सम्मानों से फिल्म यूनिट और उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर है ।

10th भारत इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल मुंबई 2025-26 में क्लासिक एंटरटेनमेंट के बेनर तले निर्मित फिल्म ‘अपना अमिताभ’ को बेस्ट फ़िल्म अवार्ड

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में डॉ. कृष्णा चौहान ने 5वें राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026″ का किया भव्य आयोजन

सुनील पाल, अली खान दीपा नारायण झा, डॉ अजय सहाय, आदित्य सिंघानिया, फिल्म निर्माता सीडी शेटे, दीपक सावंत, दीपक देसाई, रमेश गोयल, एसीपी संजय पाटिल, रेखा राव, गिरीश थापर,  ब्राइट आउटडोर मीडिया के प्रतिनिधि, सहित कई हस्तियां हुईं सम्मानित

मुम्बई. गणतंत्र दिवस के अवसर पर डॉ कृष्णा चौहान द्वारा राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026 का आयोजन 26 जनवरी को किया. ये इस अवॉर्ड का 5वां साल रहा. यह समारोह 26 जनवरी को मुंबई के मेयर हॉल में हुआ जहाँ कई सिलेब्रिटीज के हाथों अवार्डी को राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026 से नवाजा गया।

संदेसे आते हैं गीत के द्वारा शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई. दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत हुई.

सम्मान समारोह मे मुख्य अतिथि, ऐक्टर अली खान, सुनील पाल, दीपा नारायण झा, डॉ अजय सहाय, आदित्य सिंघानिया, फिल्म निर्माता सीडी शेटे C D Shetye दीपक सावंत, दीपक देसाई, रमेश गोयल, एसीपी संजय पाटिल, रेखा राव, फैयाज अली खान, गिरीश थापर,  नरेश,  राकेश आचार्य, राजू टांक, मंगेश, कोमल कटारिया, जे के तिवारी सहित कई हस्तियां शामिल हुईं.

एंकर आरजे आरती ने शो की बखूबी एंकरिंग की. कोमल कटारिया ने अपनी परफॉर्मेंस से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया.

इस बार यह पुरस्कार समारोह पहले से बड़ा और बेहतर रहा। समाज सेवा और भारतीय फिल्मों एवं उसकी तरक्की में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को इस पुरस्कार से नवाजा गया। काफी सारी हस्तियां इस समारोह में शामिल हुईं।

ब्राइट आउटडोर मीडिया के प्रतिनिधि, सिंगर एनके नरेश, सागर आचार्य, गीतकार विक्की नागर, वैष्णव देवा को भी अवॉर्ड दिया गया. सिंगर नरेश और सागर आचार्य ने गीत गाए.

अली खान ने डॉ कृष्णा चौहान की प्रशंसा की। डॉ कृष्णा चौहान न केवल एक सफल फ़िल्म निर्देशक एवं समाज सेवक हैं बल्कि अवार्ड्स फंक्शन करने के मामले में सबसे अधिक चर्चा में रहते हैं। वह केसीएफ के अंतर्गत बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड, बॉलीवुड आइकोनिक एवॉर्ड, लीजेंड दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और महात्मा गांधी रत्न अवार्ड का आयोजन पिछले कई वर्षों से करते आ रहे हैं। आयोजक डॉ कृष्णा चौहान को इस प्रोग्राम के आयोजन के लिए सभी मेहमानों ने बधाइयाँ दी. वह पिछले 5 साल से इस कार्यक्रम का आयोजन लगातार करते आ रहे हैं।

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में डॉ. कृष्णा चौहान ने 5वें राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026″ का किया भव्य आयोजन

 

5 साल की Mudra Mahesh Jadhav ने जीता दर्शकों का दिल, वेब सीरीज़ ‘घर की रौनक’ में निभाया मुख्य बाल कलाकार का दमदार किरदार

मुंबई: बाल कलाकार Mudra Mahesh Jadhav, महज़ 5 वर्ष की उम्र में, अभिनय की दुनिया में एक सशक्त पहचान बना रही हैं। उन्होंने Green World Media Production के बैनर तले बनी वेब सीरीज़ “घर की रौनक” में मुख्य लीड चाइल्ड आर्टिस्ट की भूमिका निभाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

कम उम्र के बावजूद Mudra ने अपने किरदार में जो मासूमियत, सच्चाई और भावनात्मक गहराई दिखाई है, वह काबिल-ए-तारीफ है। उनकी परफॉर्मेंस कहानी की आत्मा को मजबूती देती है और दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाती है।

इस वेब सीरीज़ का निर्देशन जाने-माने निर्देशक B. S. Ali ने किया है, जिन्होंने Mudra को न सिर्फ़ सही मार्गदर्शन दिया बल्कि उन्हें विशेष अभिनय प्रशिक्षण देकर इस मुकाम तक पहुँचाया। निर्देशक का मानना है कि Mudra में भविष्य की एक बेहतरीन कलाकार बनने की पूरी क्षमता है।

“घर की रौनक” एक पारिवारिक ड्रामा वेब सीरीज़ है, जो जल्द ही एक प्रमुख OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ होने जा रही है। इंडस्ट्री में इस प्रोजेक्ट को लेकर पहले से ही उत्सुकता देखी जा रही है।

Mudra Mahesh Jadhav की यह शुरुआत न सिर्फ़ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से प्रतिभा किसी भी उम्र में चमक सकती है।

5 साल की Mudra Mahesh Jadhav ने जीता दर्शकों का दिल, वेब सीरीज़ ‘घर की रौनक’ में निभाया मुख्य बाल कलाकार का दमदार किरदार

पॉडकास्ट के ज़माने में दीपक सारस्वत का धमाका, फेमस इनफ्लुएंसर ने रचा इतिहास

सोशल मीडिया की दुनिया में एक नया इतिहास रचते हुए दीपक सारस्वत ने इंस्टाग्राम पर सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। महज़ 24 घंटे में 100 मिलियन व्यूज़ हासिल कर उन्होंने भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स की दुनिया में एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित किया।

12 जनवरी को ‘भारत पॉडकास्ट’ नामक दीपक सारस्वत द्वारा डाले गए वीडियो को महज एक घंटे में 10 मिलियन व्यूज मिले l इस वीडियो में दीपक सारस्वत ने “आठ की पहाड़ा” को जीवन से जोड़कर एक गहरी और भावनात्मक व्याख्या प्रस्तुत की।

इस अनोखे अंदाज़ ने दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि केवल 6 घंटे के भीतर ही वीडियो 60 मिलियन व्यूज़ तक पहुँच गया। लोगों ने इसे भय और जीवन के संघर्षों का प्रतीक मानते हुए खूब सराहा।

रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि –

– इंस्टाग्राम पर किसी भारतीय वीडियो को इतने कम समय में इतने व्यूज़ मिलना अब तक असंभव माना जाता था।

– दीपक सारस्वत का यह वीडियो न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

– यह उपलब्धि दर्शाती है कि पॉडकास्ट और डिजिटल कंटेंट का प्रभाव किस तरह से नई ऊँचाइयों को छू रहा है।

पहले भी रचे हैं कई कीर्तिमान –

दीपक सारस्वत इससे पहले भी फेसबुक पर कई रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। बतौर फ़िल्म निर्माता और पॉडकास्टर, उन्होंने लगातार यह साबित किया है कि भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

दर्शकों की प्रतिक्रिया –

– लाखों यूज़र्स ने वीडियो को शेयर किया और कमेंट्स में सराहना की।

– कई लोगों ने इसे “भारतीय डिजिटल क्रांति का नया अध्याय” बताया।

– युवा दर्शकों में यह वीडियो खासा लोकप्रिय रहा, जिसने इसे वायरल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

भविष्य की दिशा –

दीपक सारस्वत की यह सफलता यह साबित करती है कि भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स अब केवल देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं। पॉडकास्ट और शॉर्ट वीडियो का यह संगम आने वाले समय में डिजिटल मीडिया की दिशा तय कर सकता है।

https://www.instagram.com/reels/DTXrHFEjbt2/

पॉडकास्ट के ज़माने में दीपक सारस्वत का धमाका, फेमस इनफ्लुएंसर ने रचा इतिहास

लोकसंगीत की विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम : ममता शर्मा

लोकसंगीत की शुद्ध परंपरा को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जीवंत बनाए रखने वाली चर्चित लोकगायिका ममता शर्मा इन दिनों श्रोताओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। बनारस की सांस्कृतिक चेतना से रचा-बसा उनका स्वर लोक और शास्त्रीय संगीत के दुर्लभ संतुलन का सशक्त उदाहरण है।

परंपरा से उपजा संगीत-सफर

ममता शर्मा बताती हैं कि उनका संगीत-सफर किसी पूर्व नियोजित योजना का परिणाम नहीं, बल्कि पारिवारिक संस्कारों की देन है। उनके दादाजी पंडित ताराचंद जैतले जी शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि रखते थे। बचपन में उनके सान्निध्य ने ही संगीत के बीज बो दिए और बहुत छोटी उम्र से लोक व शास्त्रीय संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया।

बनारस: सुर-साधना की आत्मा

बनारस में जन्मी और पली-बढ़ी ममता शर्मा के स्वर में काशी की सांस्कृतिक चेतना स्वाभाविक रूप से समाई है। कजरी, चैती और लोकधुनें उनके गायन की पहचान हैं। उनके शब्दों में, “बनारस केवल मेरी जन्मभूमि नहीं, मेरी सुर-साधना की आत्मा है।”

गुरु-परंपरा का सशक्त आधार

उन्हें बनारस घराने के जलपा गुरुजी से प्रारंभिक मार्गदर्शन मिला, जिसके बाद पद्मभूषण श्रीमती गिरिजा देवी जी की शिष्या बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दोनों गुरुओं से उन्हें शास्त्रीय अनुशासन के साथ लोकभाव की गहराई समझने का अवसर मिला यही उनके संगीत का आधार स्तंभ है।

लोकगीतों की कालजयी शक्ति

ममता शर्मा मानती हैं कि लोकगीत आम जनजीवन की भावनाओं—सुख-दुख, ऋतु, प्रेम और संघर्ष—को सहजता से स्वर देते हैं। यही कारण है कि समय बदलने पर भी लोकगीत कभी पुराने नहीं पड़ते।

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन

आज की चुनौती पर वे कहती हैं कि लोकसंगीत की शुद्धता बनाए रखते हुए उसे नए माध्यमों तक पहुँचाना आवश्यक है। प्रस्तुति और तकनीक आधुनिक हो सकती है,लेकिन लोकसंगीत की आत्मा से समझौता नहीं होना चाहिए। ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति सराहनीय है।

लोकसंगीत की विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम : ममता शर्मा

लोकसंगीत की विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम : ममता शर्मा

लोकसंगीत की शुद्ध परंपरा को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जीवंत बनाए रखने वाली चर्चित लोकगायिका ममता शर्मा इन दिनों श्रोताओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। बनारस की सांस्कृतिक चेतना से रचा-बसा उनका स्वर लोक और शास्त्रीय संगीत के दुर्लभ संतुलन का सशक्त उदाहरण है।

परंपरा से उपजा संगीत-सफर

ममता शर्मा बताती हैं कि उनका संगीत-सफर किसी पूर्व नियोजित योजना का परिणाम नहीं, बल्कि पारिवारिक संस्कारों की देन है। उनके दादाजी पंडित ताराचंद जैतले जी शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि रखते थे। बचपन में उनके सान्निध्य ने ही संगीत के बीज बो दिए और बहुत छोटी उम्र से लोक व शास्त्रीय संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया।

बनारस: सुर-साधना की आत्मा

बनारस में जन्मी और पली-बढ़ी ममता शर्मा के स्वर में काशी की सांस्कृतिक चेतना स्वाभाविक रूप से समाई है। कजरी, चैती और लोकधुनें उनके गायन की पहचान हैं। उनके शब्दों में, “बनारस केवल मेरी जन्मभूमि नहीं, मेरी सुर-साधना की आत्मा है।”

गुरु-परंपरा का सशक्त आधार

उन्हें बनारस घराने के जलपा गुरुजी से प्रारंभिक मार्गदर्शन मिला, जिसके बाद पद्मभूषण श्रीमती गिरिजा देवी जी की शिष्या बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दोनों गुरुओं से उन्हें शास्त्रीय अनुशासन के साथ लोकभाव की गहराई समझने का अवसर मिला यही उनके संगीत का आधार स्तंभ है।

लोकगीतों की कालजयी शक्ति

ममता शर्मा मानती हैं कि लोकगीत आम जनजीवन की भावनाओं—सुख-दुख, ऋतु, प्रेम और संघर्ष—को सहजता से स्वर देते हैं। यही कारण है कि समय बदलने पर भी लोकगीत कभी पुराने नहीं पड़ते।

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन

आज की चुनौती पर वे कहती हैं कि लोकसंगीत की शुद्धता बनाए रखते हुए उसे नए माध्यमों तक पहुँचाना आवश्यक है। प्रस्तुति और तकनीक आधुनिक हो सकती है,लेकिन लोकसंगीत की आत्मा से समझौता नहीं होना चाहिए। ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति सराहनीय है।

लोकसंगीत की विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम : ममता शर्मा

IMPPA President Abhay Sinha Calls For Wider And Affordable Access To Cinema At CII Big Picture Summit

The President of the Indian Motion Picture Producers’ Association (IMPPA), Mr. Abhay Sinha, emphasized the urgent need to expand affordable and accessible cinema infrastructure across India while speaking at the CII Big Picture Summit 2025.

Organised by the Confederation of Indian Industry (CII), the summit was held from December 1 to 2, 2025, at the JW Marriott Hotel, Juhu, Mumbai. The twelfth edition of the summit was themed “Connecting Creativity and Commerce in the AI Era” and brought together key leaders from government, media, technology and the entertainment industry.

IMPPA was represented at the summit by Senior Vice President Ms. Sushma Shiromani, Executive Committee Member and FMC General Secretary Mr. Nishant Ujjwal, along with Mr. Yusuf Sheikh and Mr. Manish Jain. The summit was chaired by Mr. Sanjay Jaju, Secretary, Ministry of Information and Broadcasting, Government of India.

One of the key sessions focused on “Cinema Infrastructure: Building Screens and Modern Theatres for Equitable Entertainment in India.” Addressing the session, Mr. Abhay Sinha highlighted the challenges faced by the exhibition sector, noting that multiplex ticket prices—often ranging between ₹200 and ₹250—are beyond the reach of low- and middle-income audiences. This, he said, has a direct impact on theatre footfalls and the overall growth of the film industry.

Mr. Sinha urged the government to review taxes such as TDS and GST imposed on theatres in order to provide relief and support to the exhibition sector. He also proposed the development of 100-seat mini cinema halls at bus depots and railway stations to make movie viewing more accessible to the common public.

Additionally, Mr. Sinha suggested the introduction of mobile theatres mounted on trucks, each with a seating capacity of 100, which could travel to small towns and rural areas. According to him, such initiatives would open new avenues for entertainment and expand cinematic outreach across the country.

The summit witnessed several innovative ideas aimed at strengthening India’s screen infrastructure and reaffirmed the industry’s collective commitment to inclusive, technology-driven growth.

–Shashikant Singh (Journalist)

 

IMPPA President Abhay Sinha Calls For Wider And Affordable Access To Cinema At CII Big Picture Summit

 

A Remarkable Example Of Hindu–Muslim Unity: Dua Foundation Hosts Mass Wedding Ceremony For Hundreds In Bijnor

Najibabad, Bijnor (Uttar Pradesh): Celebrating its first anniversary, Dua Foundation organized a grand mass wedding ceremony in Najibabad, Bijnor, where hundreds of couples were married in a harmonious and inclusive event. The ceremony showcased an extraordinary example of Hindu–Muslim unity, with prominent dignitaries gracing the occasion.

The program, held at Agrawal Farm House, featured Nikah ceremonies for Muslim couples while Hindu couples took part in the Varmala rituals. Distinguished guests blessed the newlyweds and extended heartfelt wishes for their future.

Under the guidance of Abdullah Gulzar (President) and Shameem Ahmed (Vice President) of Dua Foundation, the event was designed to support economically weaker families, ensuring that financial challenges did not hinder their children’s marriage. Dua Foundation sponsored the entire wedding expenses and also hosted a community feast for all attendees.

The event received special support from several respected community members, including Haji Yusuf Qureshi, Haji Yunus Qureshi, Haji Shameem Qureshi, Abdullah Gulzar, Shameem Qureshi, Haji Naseem Ahmed, Mohd. Aslam, Irfan, Imran Ikram, and Abdul Sattar.

One of the most notable aspects of the ceremony was its inclusive nature, as people from different religions and communities benefited from the initiative. The event has been widely appreciated as an important step toward building a harmonious and compassionate society.

In just one year, Dua Foundation has made a distinguished mark through numerous welfare activities.

The NGO extends help to the poor, provides assistance to hospital patients, supports the education of underprivileged students, and arranges marriages for boys and girls from low-income families. By organizing mass weddings for hundreds, the Foundation has touched countless lives and earned heartfelt blessings from beneficiaries and their families.

Attendees praised the initiative, describing it as an exemplary act deserving of the highest appreciation. Congratulating the entire team of Dua Foundation, they emphasized that while wealth may be common, a big heart is rare—and the Foundation has proven its commitment to humanity through action.

In today’s era of rising expenses, many families fall into debt to conduct a wedding. Dua Foundation’s mass wedding initiative has brought joy and relief to numerous households.

Families of the brides, in particular, expressed immense gratitude for being able to see their children married with dignity and celebration.

The grand event marked not only a celebration of marriage but also a celebration of unity, generosity, and shared humanity—values that Dua Foundation continues to champion.

 

A Remarkable Example Of Hindu–Muslim Unity: Dua Foundation Hosts Mass Wedding Ceremony For Hundreds In Bijnor

इम्पा अध्यक्ष अभय सिन्हा ने CII बिग पिक्चर समिट में सिनेमा तक व्यापक और किफायती पहुंच का आह्वान किया

इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के अध्यक्ष श्री अभय सिन्हा ने CII बिग पिक्चर समिट 2025 के दौरान पूरे भारत में किफायती और सुलभ सिनेमा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) द्वारा आयोजित यह समिट 1 से 2 दिसंबर 2025 तक मुंबई के जुहू स्थित जेडब्ल्यू मैरियट होटल में आयोजित हुआ। यह समिट अपने बारहवें संस्करण में “AI युग में क्रिएटिविटी और कॉमर्स को जोड़ना” थीम के साथ संपन्न हुआ, जिसमें सरकार, मीडिया, टेक्नोलॉजी और एंटरटेनमेंट जगत के प्रमुख नेता शामिल हुए।

इस समिट में IMPPA का प्रतिनिधित्व सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सुश्री सुषमा शिरोमणि, एक्जीक्यूटिव कमेटी मेंबर व FMC के जनरल सेक्रेटरी श्री निशांत उज्ज्वल, श्री यूसुफ शेख और श्री मनीष जैन ने किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू ने समिट की अध्यक्षता की।

समिट का एक प्रमुख सत्र “Cinema Infrastructure: Building Screens and Modern Theatres for Equitable Entertainment in India” विषय पर केंद्रित रहा। सत्र को संबोधित करते हुए श्री अभय सिन्हा ने कहा कि आज मल्टीप्लेक्स में टिकट दरें 200 से 250 रुपये तक होने के कारण निम्न और मध्यम आय वर्ग के दर्शकों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं, जिससे थिएटर फुटफॉल और पूरी फिल्म इंडस्ट्री की ग्रोथ प्रभावित हो रही है।

उन्होंने थिएटर उद्योग पर लगने वाले TDS और GST जैसे करों की समीक्षा कर एग्ज़िबिशन सेक्टर को राहत देने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि बस डिपो और रेलवे स्टेशनों पर 100 सीटों वाले मिनी सिनेमाघरों का निर्माण किया जाए, ताकि आम जनता के लिए फिल्म देखना अधिक सुलभ हो सके।

श्री सिन्हा ने ट्रकों पर आधारित 100 सीटों वाले मोबाइल थिएटर शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा, जो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बना सकें। उनके अनुसार, यह पहल देश में मनोरंजन के नए अवसर पैदा करेगी और क्षेत्रीय दर्शकों को सिनेमाई अनुभव से जोड़ेगी।

समिट के दौरान भारत में स्क्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने को लेकर कई नवाचारी विचार सामने आए और टेक्नोलॉजी-आधारित, समावेशी विकास के प्रति इंडस्ट्री की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

—शशिकांत सिंह (पत्रकार)

इम्पा अध्यक्ष अभय सिन्हा ने CII बिग पिक्चर समिट में सिनेमा तक व्यापक और किफायती पहुंच का आह्वान किया