‘द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर’ को १९ अप्रैल महावीर जयंती पर सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी

महावीर जयंती के पावन अवसर पर रिलीज़ होने वाली फ़िल्म ‘द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर’, पिछले कुछ हफ़्तों में हुए निराधार प्रतिरोध को कड़ी टक्कर देकर सिनेमाघरों में 19 अप्रैल 2024 को महावीर जयंती के दिन प्रदर्शित की जाएगी। कई लोगों ने इसे सत्य की जीत बताया है । फ़िल्म के निर्माता अभिषेक मालू ने आश्वस्त किया कि ये फ़िल्म जैन परंपरा की अद्भुत और अनकही यशोगाथा को साझा करेगी। फिल्म की टीम ने लोगों से सिनेमाघरों में आने का अनुरोध किया है।

हाल ही में हुए इंटरव्यू के दौरान, अभिषेक मालू ने बताया कि फिल्म को लेकर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की गई अफवाहें उन्हें परेशान कर रही थीं, लेकिन उन्होंने इसके खिलाफ सख्ती से खड़ा होकर स्पष्ट किया कि फिल्म में किसी भी अभद्र या अनुचित मात्रा में कोई विषय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी फिल्म पर किसी भी प्रकार का बैन या स्टे नहीं लगाया गया था। जो भी समय सीबीएफसी ने रिव्यू करने में लिया, यह वही प्रतीक्षा थी।

इस फिल्म के माध्यम से, दर्शकों को जैन धर्म के महत्वपूर्ण तत्वों को दर्शाया जाएगा। इस फिल्म में राजा ऋषभ देव से लेकर भगवान महावीर तक का सफर, और खरतरगच्छ की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को एक रोचक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

फ़िल्म की टीम ने विरोध-कर्ताओं को एक बार ये फिल्म देखने की सलाह दी और फिर अपना नज़रिया बनाने का आग्रह किया है । उन्होंने यह भी कहा कि उनकी फिल्म के माध्यम से जैन धर्म की महानता को लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास है और उम्मीद है कि लोगों में इस धर्म के प्रति अधिक आस्था और ज्ञान का विकास होगा।

निर्माता व निर्देशकों ने अपनी फिल्म को बनाने के लिए किए गए प्रयासों को बताते हुए कहा कि धर्म और समाज को समझने में फिल्मों का एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो लोगों की आस्था में वृद्धि और संबंधों में एकता लाता है।

फिल्म के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विवेक सुधींद्र कुलश्रेष्ठ हैं, इसका निर्देशन प्रदीप पी. जाधव और विवेक अय्यर ने किया है। फिल्म के लेखक और गीतकार प्रशान्त बेबार हैं, और संगीत विवियन रिचर्ड और विपिन पटवा का है। इस फिल्म में गीतों को पद्मश्री कैलाश खेर, जावेद अली, और दिव्य कुमार जैसे मशहूर गायकों ने आवाज दी है।

‘द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर’ को १९ अप्रैल महावीर जयंती पर सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी

Avataran – A Solo Art Show By Anita Goel Unveiled On February 4

After the British Raj, India experienced profound transformations, yet the art education system in schools remained entrenched in traditional paradigms. Despite centuries of artists asserting their individuality, the Indian school system persists in promoting a specific style of art, echoing Western academic conventions.

Renowned artist Anita Goel challenges this status quo with her upcoming solo exhibition, Avataran. Scheduled to unveil on February 4, Goel seeks to revolutionise the prevailing artistic norms entrenched within Indian educational institutions.

“The school art system perpetuates undistinguished artworks, stifling creativity,” remarks Anita Goel. “My aim is to disrupt this homogeneity and redefine contemporary Indian art.”

Anita Goel’s artistic vision transcends conventional boundaries. Her creations extend beyond the confines of the canvas, exploring the latent potential of painting tools, particularly the use of painting knives. Embracing the ethos of abstract expressionism, Goel eschews the notion that a painting must convey a specific message or narrative, prioritising instead the interplay of form and medium.

At the heart of Goel’s oeuvre lies a bold exploration of form, colour, and texture. Each piece beckons viewers to delve deeper, guided by recurring avian motifs—an homage to her previous series, Udaan, and a prelude to Avataran. The avian imagery serves as a narrative thread, inviting observers to uncover new perspectives with each glance.

Through the deliberate selection of irregularly shaped canvases and varying thicknesses, Goel creates a sense of three-dimensionality within the confines of a flat surface. The textured layers of knifed paint engage with the canvas’s nuanced topography, compelling viewers to engage with the work on multiple levels.

Join us for the unveiling of Avataran on February 4, at 12:00noon at Jolie’s, Worli as Anita Goel invites audiences to embark on a transformative journey through the realms of contemporary Indian art.

Anita Goel’s Avataran is on from Feb 4, from 12 noon at Jolie’s, Birla Centurion, Pandurang Budhkar Marg, Century Mills Compound, Worli, Mumbai, Maharashtra 400030.

 

Avataran – A Solo Art Show By Anita Goel Unveiled On February 4

अनीता गोयल की एकांकी कला प्रदर्शनी ‘अवतरण’ 4 फरवरी से

भारत में ब्रिटिश राज की समाप्ति के बाद देश में कई तरह के आमूलचूल परिवर्तन हुए मगर कहीं ना कहीं हमारी शिक्शा व्यवस्था पर पुरातनपंथी सोच अब भी हावी है. यूं तो सदियों से तमाम कलाकार अपनी कला के माध्यम से अपनी निजता का परिचय देते आ रहे हैं मगर इसके बावजूद कला की शिक्षा देने वाले
स्कूलों पर आज भी पाश्चात्य देशों का प्रभाव देखने को मिलता है जो एक ख़ास तरह की कला को बढ़ावा देते नज़र आते हैं.
उल्लेखनीय है कि जानी-मानी आर्टिस्ट अनीता गोयल ने पाश्चात्य कला के प्रभाव को अपने सोलो कला प्रदर्शनी ‘अवतरण’ के ज़रिए चुनौती पेश करने की कोशिश की है. इस कला प्रदर्शनी का आयोजन 4 फ़रवरी से किया जा रहा है जिसके माध्यम से अनीता गोयल आज की शैक्षणिक व्यवस्था को बदलने और कला के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने की उम्मीद रखती हैं.
वे कहती हैं, “कला संबंधी स्कूल व्यवस्था ना तो उत्कृष्टता को बढ़ावा देती है और न ही रचनात्मकता को.” वे आगे कहती हैं, “मैं इस यथास्थितवाद में बदलाव लाना चाहती हूं और समसामायिक भारतीय कला को पुनर्भाषित करना चाहती हूं.”
अनीता गोयल की दूरदृष्टि कुछ ऐसी है कि वो कला की किसी भी सीमा से परे है. उनकी कलाकृतियां सिर्फ़ कैनवस तक सिमटी नहीं होती हैं. वे पेटिंग्स टूल्स व पेटिंग्स नाइव्स का बख़ूबी इस्तेमाल करना जानती हैं. कला के अमूर्त स्वरूप में महारत रखने वाली अनीता गोयल कला द्वारा किसी विशिष्ट तरह के संदेश देने के ख़्याल से इत्तेफ़ाक नहीं रखती हैं और इसकी बजाय वे स्वरूप व उसके माध्यम के अंतर-संबंधों को अधिक तवज्जो देती हैं.
उल्लेखनीय है कि अनीता गोयल अपनी कला में स्वरूप, रंग और टेक्सचर को बहुत महत्व देती हैं. उनकी कलाकृतियों में पक्षी से प्रेरित आकृतियां देखी जा सकती हैं और इसकी झलक उनकी पिछली श्रृंखला ‘उड़ान’ और आने वाली श्रृंखला ‘अवतरण’ में नज़र आती है. पक्षियों से प्रेरित उनकी कलाकृतियां एक ऐसा आभास उत्पन्न करती हैं जो नये-नये आयामों को महसूस करने के लिए प्रेरित करते हैं.
ग़ौरतलब है कि अनीता गोयल हमेशा से ही एक प्रकार के नहीं बल्कि विविध आकार और प्रकार के कैनवस का चयन करने में यकीन करती आई हैं जिसके ज़रिए वे सपाट सतह पर भी त्रिआयामी कला का आभास करानेवाली कलाकृतियां पेश करती आई हैं. वे नाइफ़ पेंट के तमाम टेक्सचर्ड सतहों के इस्तेमाल से कैनवस की स्थालकृति को विभिन्न स्तर पर एक आकर्षक कलाकृति में तब्दील करने में माहिर हैं.
अनीता गोयल की कला प्रदर्शनी ‘अवतरण’ को वरली में जोईल्स में 4 फ़रवरी को दोपहर 12.00 से देखा जा सकता है. तमाम कला प्रेमी समसामायिक भारतीय कला के माध्यम बदलाव का आह्वान करने वाले वाली इस कला प्रदर्शनी का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया है.
अनीता गोयल की कला प्रदर्शनी ‘अवतरण’ का लुत्फ़ 4 फ़रवरी से इस पते पर उठाया जा सकता है: जोइल्स, बिड़ला सेंचुरियन, पांडुरंग बुधकर मार्ग, सेंचुरी मिल्स कंपाउंड, मुम्बई, महाराष्ट्र 400030

 

अनीता गोयल की एकांकी कला प्रदर्शनी ‘अवतरण’ 4 फरवरी से

प्रख्यात चित्रकार अनिता गोयल यांचा सोलो शो ‘अवतरण’ ४ फेब्रुवारीपासून

ब्रिटीश भारतातून गेल्यानंतर भारतामध्ये अनेक महत्वपूर्ण बदल झाले, परंतु शाळांमधील कला शिक्षण मात्र त्याच पारंपरिक ब्रिटिश राजवटीतीलच राहिले असे म्हटले तर चूक ठरणार नाही. भारतातील शाळांमध्ये कला प्रशिक्षण पाश्चात्य पद्धतीने शिकवले जात असतानाही, गेल्या शतकभरात भारतातील अनेक चित्रकारांनी स्वतःचे वेगळे अस्तित्व निर्माण केले.

प्रख्यात चित्रकार अनिता गोयल याच पाश्चात्य शिक्षण पद्धतीला आव्हान दे्ण्यासाठी स्वतःचे सोलो चित्रप्रदर्शन ‘अवतरण’ भरवत आहेत. ४ फेब्रुवारी रोजी अनावरण होणाऱ्या या प्रदर्शनातून अनिता गोयल भारतीय शैक्षणिक संस्थांमध्ये प्रचलित कलात्मक नियमांमध्ये क्रांती घडवून आणण्याचा प्रयत्न करणार आहेत.

अनिता गोयल आपल्या प्रदर्शनाबाबत बोलताना म्हणाल्या, “शाळांमधील कला शिक्षण पद्धत कलाकारांची सर्जनशीलता दाबून ठेवत अविभाज्य कलाकृतींना कायम ठेवते, हा एकजीनसीपणा तोडून समकालीन भारतीय कलेची नव्याने व्याख्या करणे हे माझे उद्दिष्ट आहे.”

अनिता गोयल यांची कलात्मक दृष्टी परंपरागत सीमा ओलांडणारी आहे. त्या त्यांची निर्मिती साचेबद्ध कॅनव्हासच्या मर्यादेपलीकडे विस्तारणारी आहे. त्या पेंटिंगच्या आधुनिक साधनांचा अवलंब करतात, विशेषतः पेंटिंग चाकूचा वापर त्या खूपच उत्कृष्टपणे करतात. चित्रकलेने विशिष्ट संदेश किंवा कथन व्यक्त करण्याऐवजी फॉर्म आणि माध्यमाच्या परस्परसंवादाला प्राधान्य दिले पाहिजे. असे अनिता गोयल यांच मत आहे.

अनिता गोयल यांच्या कल्पनेच्या केंद्रस्थानी फॉर्म, रंग आणि पोत यांचा अनोखा मिलाफ करण्यात आलेला असतो. त्यांचे प्रत्येक चित्र कलेच्या आस्वादकांना चित्र सखोल जाणून घेण्यास प्रेरित करतो.  अनिता गोयल यांचे मागील चित्र प्रदर्शन उडान ला पुढे घेऊन जाणारे अवतरण चित्र प्रदर्शन आहे.  कलादर्दींनी येऊन त्यांच्या या नव्या  दृष्टीकोनाची माहिती घ्यावी असा त्यांचा प्रयत्न आहे. आणि त्यामुळेच त्यांच्या कला प्रदर्शनाला कलादर्दींनी यावे असे आवाहन अनिता गोयल करीत आहेत.

वेगवेगळ्या जाडीचे आणि आकाराचे कॅनव्हास अनिता गोयल निवडतात आणि त्यातून सपाट पृष्ठभागावर त्रिमितीय कलाकृती निर्माण करतात. त्यांच्या कलाकृतीवर चाकूने रंग भरलेले असतात. त्यामुळेच कलादर्दींना त्यांचे चित्र अनेक स्तरांवर असल्याचे भासते.

वरळी येथील जोलीज येथे 4 फेब्रुवारी रोजी दुपारी १२ वाजता अवतरण या चित्र प्रदर्शनाला सुरुवात होणार असून हे चित्र प्रदर्शन येण्यासाठी अनिता गोयल सगळ्यांना आमंत्रित करीत आहेत. कलादर्दींना समकालीन भारतीय कलेच्या क्षेत्रातून परिवर्तनशील प्रवासाचा अनुभव देणारे असे हे चित्र प्रदर्शन असणार आहे.

अनिता गोयल यांचे अवतरण प्रदर्शन 4 फेब्रुवारी रोजी दुपारी 12 वाजल्यापासून जोलीज, बिर्ला सेंच्युरियन, पांडुरंग बुधकर मार्ग, सेंच्युरी मिल्स कंपाउंड, वरळी, मुंबई, महाराष्ट्र 400030 येथे सुरू होणार आहे.

 

प्रख्यात चित्रकार अनिता गोयल यांचा सोलो शो ‘अवतरण’ ४ फेब्रुवारीपासून

Manushi Chillar Graces The Painting Exhibition Of Ayaan, A 13 Year Old UNESCO Award Winning Artist Who Is Ongoing Battle With Duchenne Muscular Dystrophy (DMD).

In a heartwarming display of communal solidarity, the story of Ayaan, a 12-year-old prodigy from Gujarat, India, has touched hearts far and wide. Diagnosed with Duchenne Muscular Dystrophy (DMD) at the tender age of eight—a condition so rare it occurs in one in a million—Ayaan’s journey has been nothing short of inspirational. Despite the daunting odds, including the disease’s singular, globally approved treatment, Ayaan’s family, hailing from a modest middle-class background, faced an uphill battle in securing his medical care.

The treatment, Vitilipso, a precious vial procured from a UK-based company, has offered a beacon of hope. Through the relentless efforts of countless individuals and the overwhelming support of society across India, particularly from Gujarat, a fund of approximately two and a half to three crore rupees was raised. This remarkable feat has covered the first year of Ayaan’s treatment, showing significant improvement in his condition.

Parallel to his medical battle, Ayaan’s passion for art blossomed. His exceptional talent has not only earned him a UNESCO award but also the esteemed title of UNESCO Heritage Artist. Ayaan’s art, celebrated for its depth and beauty, reflects his profound love for history and a keen interest in global wars. His works have transcended borders, captivating audiences worldwide and spreading awareness about DMD.

In an effort to continue his treatment and celebrate his extraordinary talents, Ayaan’s parents have organized an art show in Bombay. This event is not just an exhibition of Ayaan’s artistry but a call to action, urging everyone to contribute to his ongoing treatment. It’s a plea for support, through press and digital platforms, inviting the community to donate and ensure Ayaan’s fight against DMD is one he does not face alone. Let us come together, for every small contribution paves the path for Ayaan’s brighter, healthier future.

 

Manushi Chillar Graces The Painting Exhibition Of Ayaan, A 13 Year Old UNESCO Award Winning Artist Who Is Ongoing Battle With Duchenne Muscular Dystrophy (DMD).

विश्व कैंसर दिवस 2024: नारायण आयुर्वेद ने कैंसर के इलाज के लिए लॉन्च की KIM 100 दवा

जयपुर (5 फरवरी 2024):** विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर, राजस्थान के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा निर्माता नारायण आयुर्वेद ने कैंसर के इलाज के लिए KIM 100 नामक एक नई दवा लॉन्च की है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल सिंह ने बताया कि यह दवा कैंसर जैसी घातक बीमारियों का इलाज आयुर्वेद के माध्यम से सम्भव बनाती है और बहुत प्रभावी है

उन्होंने कहा, “यह आयुर्वेदिक औषधि कैंसर में बहुत लाभकारी है। डॉ ओम प्रकाश चौधरी ने कहा राजस्थान के प्रतिष्ठित आयुर्वेदाचार्यों और रिसर्च टीम के साथ कड़ी मेहनत के बाद इस दवा का निर्माण हुआ है। आज के दिन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में नारायण आयुर्वेद भी खड़ा है।”

KIM 100 दवा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बनी है और इसमें कोई हानिकारक रसायन नहीं है। यह दवा कैंसर के सभी प्रकारों में प्रभावी है, खासकर स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, और पेट का कैंसर। यह दवा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

नारायण आयुर्वेद कैंसर के मरीजों को सस्ती और प्रभावी दवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी KIM 100 दवा को सभी कैंसर मरीजों के लिए आयुर्वेद से जोड़ने के लिए काम कर रही है।

*विश्व कैंसर दिवस*

विश्व कैंसर दिवस हर साल 4 फरवरी को मनाया जाता है। यह दिन लोगों को कैंसर के बारे में जागरूक करने और इस बीमारी से बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी देने के लिए मनाया जाता है

*नारायण आयुर्वेद*

नारायण आयुर्वेद राजस्थान का एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा निर्माता है। कंपनी 10 वर्षों से आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण कर रही है। नारायण आयुर्वेद कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रभावी आयुर्वेदिक दवाएं प्रदान करती है।

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विश्व कैंसर दिवस 2024: नारायण आयुर्वेद ने कैंसर के इलाज के लिए लॉन्च की KIM 100 दवा

क्रेसांडा: भारतीय रेलवे के लिए एक वरदान!

क्रेसांडा रेलवे सॉल्यूशंस लिमिटेड (पूर्व में क्रेसांडा सॉल्यूशंस लिमिटेड) द्वारा होटल मरीन प्लाजा के खूबसूरत अल्लामांडा टेरेस पर रात में शांत समुंदर के दृश्य के साथ एक शानदार रात थी, जिसमें लोकप्रिय गायक जाजिम शर्मा ने बेहतरीन गाने गाए।

क्रेसांडा को “शेयरधारकों, भागीदारों, निवेशकों और लाभार्थियों के बीच अविश्वसनीय विकास, मूल्य और क्षमता के साथ रेलवे सहायक सेवाएं और अग्रणी डिजिटल मीडिया सफलताओं की पेशकश करने वाली पहली और एकमात्र बीएसई-सूचीबद्ध उच्च प्रदर्शन वाली निजी कंपनी कहा जाता है।”

इस मिलन समारोह में शामिल होने वालों में प्रसिद्ध निर्देशक पद्मश्री मधुर भंडारकर, पूर्व आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंह और फायरब्रांड वकील और सामाजिक कार्यकर्ता आभा सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अर्चना त्यागी, अभिनेता आदित्य पंचोली, अर्जन बाजवा, अश्मित पटेल, मुकेश त्यागी और पितोबाश त्रिपाठी, निर्देशक साई कबीर, संगीत निर्देशक दिलीप सेन, विपुल रॉय, अभिनेत्री बृंदा पारेख, स्टेट बैंक ऑफ मॉरीशस के पूर्व एमडी सिद्धार्थ रथ, शीर्ष होटल व्यवसायी विट्ठल कामत, अभिनेत्री कनिका गौतम, अभिनेत्री आरती नागपाल, गायिका जसविंदर नरूला, कुलदीप कुमार करीर, एनसीएलटी सदस्य, राम जजोदिया, सीपी शर्मा, सत्य प्रकाश, मुंबई मेट्रो के सलाहकार, शीर्ष उद्यमी सलिल चतुर्वेदी, जो राजन और अविजित नंदा, सुपर-शेफ वरुण इनामदार, प्रसिद्ध सूफी गायक फरहान साबरी, पूर्व एयर इंडिया निर्देशक अमोध शर्मा, शीर्ष राजनेता पूर्व विधायक कृष्णा हेगड़े, महेश तापसे और शमीम हावा आदि।

“इन्नोवेशन के प्रति 40 वर्षों से अधिक की प्रतिबद्धता के साथ, क्रेसांडा का लक्ष्य आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों को छूना और उद्योग के मील के पत्थर को पार करना है,” क्रेसांडा के उत्साही अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व शीर्ष रेलवे अधिकारी सी पी शर्मा ने कहा।

क्रेसांडा के गतिशील प्रबंध निदेशक अरुण त्यागी ने कहा, “एक संपूर्ण रेल मीडिया पावरहाउस के रूप में, हम इस तेज़ गति वाले बाज़ार में अत्याधुनिक तकनीक को एकीकृत करके रेलवे में मीडिया इनोवेशन को बढ़ावा देते हैं।”

बढ़ते भारतीय बाजार में सौर और जलविद्युत के क्षेत्र में भविष्य की ऊर्जा प्रगति लाने के लिए क्रेसांडा ने क्रेसांडा रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड की स्थापना के साथ रिन्यू के लायक ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति समान रूप से महसूस की है।

आप देखें कि क्रेसेंडा कैसे नए नए कीर्तिमान स्थापित करता जा रहा है।

क्रेसांडा: भारतीय रेलवे के लिए एक वरदान!

70 देशों ने डॉ. संदीप मारवाह को अपने कल्चरल एम्बेसडर के रूप में नॉमिनेट किया !

वास्तविक सम्मान और पहचान यूं ही नहीं मिलती। काम के प्रति समर्पण, जुनून और आपने जो प्रयास किया है उसे हासिल करने का उत्साह एक दिन में नहीं आता है।
कला और संस्कृति के प्रति उनके अटूट समर्पण और असीम जुनून के एक उल्लेखनीय प्रमाण में, शीर्ष एंटरप्रेन्योर और शिक्षाविद् डॉ. संदीप मारवाह को एक अनोखे सम्मान से सम्मानित किया गया है, जिसका दावा दुनिया में बहुत कम लोग कर सकते हैं। एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के सत्तर देशों ने डॉ. मारवाह को अपने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में नामित करके उनके प्रति अपना विश्वास और प्रशंसा बढ़ाई है।
डॉ. मारवाह का मिशन यह है कि इन देशों और भारत के बीच कला और संस्कृति की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देना और आगे बढ़ाना, सीमाओं से परे समझ और प्रशंसा का एक पुल बनाना।
एक अग्रणी दूरदर्शी,
डॉ. मारवाह दूरदर्शी नेतृत्व और रचनात्मक कारोबार के एक प्रेरक उदाहरण के रूप में खड़े हैं। दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते फिल्म केंद्र, नोएडा फिल्म सिटी के संस्थापक के रूप में, उनकी विरासत 16 संपन्न स्टूडियो और 350 चैनलों में अंकित है जो 162 देशों में प्रसारित होते हैं। यह उल्लेखनीय इको सिस्टम तीन शिफ्टों में लगभग 17,000 मीडिया पेशेवरों को रोजगार देता है, और इसका प्रभाव आश्चर्यजनक रूप से 150,000 व्यक्तियों तक फैला हुआ है जो इस सिनेमाई चमत्कार की बदौलत अपनी रोजी रोटी कमाते हैं।
मारवाह स्टूडियो, उनके शानदार मुकुट का एक और रत्न, 50 से अधिक चैनलों के लिए आश्चर्यजनक 4,500 टेलीविजन कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है और नौ विविध भाषाओं में 125 फीचर फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, स्टूडियो ने 5,000 ट्रेनिंग फिल्मों, 3300 शॉर्ट फिल्मों का योगदान दिया है और कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चैनलों के लिए कार्य किया है।
फिल्म और मीडिया में अग्रणी शिक्षा
डॉ. मारवाह की अदम्य भावना ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (एएएफटी) की स्थापना की, जो भारत का पहला निजी फिल्म स्कूल और देश में अपनी तरह का चौथा स्कूल था। 75 विभिन्न पाठ्यक्रमों में 145 देशों के 30,000 पेशेवरों को तैयार करने की गौरवपूर्ण विरासत के साथ, एएएफटी ने अब रायपुर में फिल्म, टेलीविजन और मीडिया यूनिवर्सिटी की शुरुआत की है।
डॉ. मारवाह ने एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के 69 देशों की सरकारों का आभार जताया है जिन्होंने उन पर भरोसा किया है। वह 7,500 शानदार कार्यक्रमों को याद करते हैं, जिसमें 156 देशों के आश्चर्यजनक रूप से 30 लाख लोगों ने भाग लिया था, यह सब मारवाह स्टूडियो की एकजुट भावना से संभव हुआ था। यह संस्थान अब भारत की समृद्ध कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत और उभरते मीडिया और मनोरंजन उद्योग की बेहतरीन खिड़की बन गया है।
इन 69 कल्चरल एम्बेस्डरशिप के माध्यम से, सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक सुंदर कड़ी उभरी है, जो इन देशों को भारत के दिल के करीब लाती है। इस उद्देश्य के प्रति डॉ. मारवाह की प्रतिबद्धता ने उन्हें दुनिया भर में यात्रा करने और इन विविध देशों के साथ भारत के संबंधों के बारे में जागरूकता और समझ फैलाने के लिए प्रेरित किया है।
डॉ. मारवाह इन 70 देशों के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, राज्यपालों, मंत्रियों, राजदूतों और उच्चायुक्तों की सराहना करते हैं। साथ में, उन्होंने 69 अनूठे फ़ोरम का ताना-बाना बुना है, जिनमें से प्रत्येक फोरम संस्कृति, एकता और कूटनीति की शक्ति का प्रमाण है।
इन देशों के समूह में अफगानिस्तान, अर्मेनिया, अजरबैजान, बोस्निया, बहामास, बेलारूस, ब्राजील, बुल्गारिया, कंबोडिया, चिली, चीन, कोमोरोस, साइप्रस, चेक गणराज्य, क्यूबा, मिस्र, फिजी, गैबॉन, गाम्बिया, जॉर्जिया, जर्मनी, घाना, ग्वाटेमाला, ग्वाणा, हंगरी, आइसलैंड, ईरान, इराक, आयरलैंड, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, इज़राइल, लेबनान, लेसोथो, मालदीव, मलेशिया, मंगोलिया, मोंटेनेग्रो, मोरक्को, म्यांमार, नेपाल, नाइजीरिया, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पलाऊ, पराग्वे, पेरू, पोलैंड, रियासत मोंटे डी एग्रेला, रोमानिया, रूस, रवांडा, सेनेगल, सर्बिया, स्लोवाक, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, ताजिकिस्तान, तूनीशिया, तुर्कमेनिस्तान, त्रिनिदाद एंड टोबैको, उज्बेकिस्तान, उरुग्वे, वेनेज़ुएला, वियतनाम, वेल्स, दक्षिण कोरिया , डीपीआर कोरिया, मॉरीशस शामिल हैं। यह लिस्ट उस वैश्विक पहचान की प्रतीक है जिसे डॉ. मारवाह ने हासिल किया है, जिससे एक सच्चे वैश्विक सांस्कृतिक राजदूत के रूप में उनकी भूमिका मजबूत हुई है।
डॉ. मारवाह की असाधारण यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का काम करती है, हमें याद दिलाती है कि कला, संस्कृति और मीडिया शक्तिशाली पुल हैं जो देशों को जोड़ सकते हैं और दुनिया भर में दोस्ती और समझ के स्थायी बंधन को बढ़ावा दे सकते हैं।

 

70 देशों ने डॉ. संदीप मारवाह को अपने कल्चरल एम्बेसडर के रूप में नॉमिनेट किया !