सिर्फ़ 6 साल के मोहम्मद अशर ने ग्रीन वर्ल्ड मीडिया प्रोडक्शन की हिंदी वेब सीरीज “कच्चे रिश्ते पार्ट 2” में मुख्य भूमिका निभाई

मुम्बई.  प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती है.  इसका ताजा उदाहरण है मात्र 6 साल के मोहम्मद अशर जिन्होंने निर्देशक बी एस अली की हिंदी वेब सीरीज “कच्चे रिश्ते पार्ट 2” में मुख्य भूमिका निभाई है. दिग्गज ऐक्टर रमेश गोयल ने भी इस वेब सीरीज में काम किया है और वह मोहम्मद अशर के दादा की भूमिका में नजर आएंगे. ठाणे के रहने वाले चाइल्ड ऐक्टर ने ग्रीन वर्ल्ड मीडिया प्रोडक्शन की हिंदी सीरीज मे मेन लीड किया है जिनकी शूटिंग हो गई है. जल्द ही इसे रिलीज किया जाएगा.

अल्ताफ अहमद और हुदा रहमान के पुत्र मोहम्मद अशर को डांस और गायकी का शौक है.

निर्माता निर्देशक बी एस अली द्वारा नए कलाकारों को मौका दिया जा रहा है और उन्हें अभिनय की ट्रेनिंग भी दी जाती है. उनकी ही खोज हैं मोहम्मद अशर जो अपने प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित हैं.

बी एस अली ने कहा कि इस वेब सीरीज की शूटिंग मुंबई में पूरी हो गई है. सीरीज की कहानी दर्शको को बांध कर रखेगी और उन्हें भरपूर मनोरंजन प्रदान करेगी।

मोहम्मद अशर ने निर्देशक बीएस अली की प्रशंसा की और उनका शुक्रिया अदा किया है।

  

सिर्फ़ 6 साल के मोहम्मद अशर ने ग्रीन वर्ल्ड मीडिया प्रोडक्शन की हिंदी वेब सीरीज “कच्चे रिश्ते पार्ट 2” में मुख्य भूमिका निभाई

सिर्फ़ 11 साल की रिद्धि मंगेश पाटिल ने ग्रीन वर्ल्ड मीडिया प्रोडक्शन की हिंदी वेब सीरीज “कच्चे रिश्ते पार्ट 2” में रमेश गोयल के साथ किया अभिनय

मुम्बई.  सिर्फ 11 साल की रिद्धि मंगेश पाटिल ने अपने अभिनय से सबको  आश्चर्यजनक कर दिया है. उनकी प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं है.  रिद्धि मंगेश पाटिल ने निर्देशक बी एस अली की हिंदी वेब सीरीज “कच्चे रिश्ते पार्ट 2” में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दिग्गज ऐक्टर रमेश गोयल ने भी इस वेब सीरीज में काम किया है और उन्होने रिद्धि मंगेश पाटिल की अदाकारी की प्रशंसा की है.

भिवंडी ठाणे की रहने वाली चाइल्ड एक्ट्रेस ने ग्रीन वर्ल्ड मीडिया प्रोडक्शन की हिंदी सीरीज मे बहुत अच्छा रोल किया है जिनकी शूटिंग हो गई है. जल्द ही इसे रिलीज किया जाएगा.

शौक अभिनय, खेल

मंगेश कमलाकर पाटिल और मोना मंगेश पाटिल की पुत्री रिद्धि मंगेश पाटिल को अभिनय और खेल का शौक है. उन्हें मराठी, हिंदी, अंग्रेजी भाषाएं आती है. उनके पिता एस्टेट एजेंट हैं जबकि माता ब्यूटीशियन हैं.

प्रोड्यूसर डायरेक्टर बी एस अली द्वारा नए कलाकारों को अवसर दिया जा रहा है और उन्हें अभिनय की ट्रेनिंग भी दी जाती है. उनकी ही खोज हैं रिद्धि मंगेश पाटिल जो अपने प्रोजेक्ट को लेकर एक्साइटेड हैं.

बी एस अली ने बताया कि इस वेब सीरीज की शूटिंग मुंबई में कम्प्लीट हो गई है. सीरीज की स्टोरी दर्शको को पसंद आएगी और उन्हें भरपूर एंटरटेनमेंट प्रदान करेगी।रिद्धि मंगेश पाटिल बहुत अच्छी अभिनेत्री हैं. इस आयु मे भी उनकी प्रतिभा अद्भुत है.

रिद्धि मंगेश पाटिल ने निर्देशक बीएस अली की तारीफ की और उनको धन्यवाद दिया है।

 

सिर्फ़ 11 साल की रिद्धि मंगेश पाटिल ने ग्रीन वर्ल्ड मीडिया प्रोडक्शन की हिंदी वेब सीरीज “कच्चे रिश्ते पार्ट 2” में रमेश गोयल के साथ किया अभिनय

दीपक सारस्वत: समाज सेवा की मिसाल, फिल्मों के साथ-साथ संवार रहे हैं जरूरतमंदों की तकदीर

मनोरंजन जगत की चकाचौंध से दूर, फिल्म निर्माता और समाजसेवी दीपक सारस्वत ने समाज सेवा के क्षेत्र में एक ऐसी लकीर खींच दी है, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। दीपक सारस्वत केवल फिल्मों के निर्माता ही नहीं हैं, बल्कि वे उन ‘उम्मीदों के निर्माता’ भी हैं जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बेहतर जीवन का सपना दिखाते हैं।

7 साल, एक संकल्प और अटूट सेवा भाव

​पिछले 7 वर्षों से दीपक सारस्वत ने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत जश्न के बजाय ‘परोपकार का उत्सव’ बना दिया है। हर साल लाखों रुपये की मदद और निरंतर जमीनी सेवा के माध्यम से उन्होंने हजारों चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है।

पिछले 5 वर्षों का सेवा रिकॉर्ड: एक नज़र में

​दीपक सारस्वत के सेवा कार्यों का सफर हर साल नए आयाम स्थापित कर रहा है।

पिछले 5 वर्षों का उनका रिकॉर्ड उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है:

*  2021 – भीषण ठंड के बीच 500 बेसहारा लोगों को कपड़े और कंबल वितरित कर राहत पहुंचाई।

*  2022 – एड्स पीड़ित मासूम बच्चों को अपनी बहन मानकर उनकी सेवा की और समाज को संवेदनशीलता का संदेश दिया।

*  2023 – जन्मदिन को ‘जन्म सप्ताह’ के रूप में मनाया और 7 दिनों के भीतर जरूरतमंदों को ₹1 लाख की आर्थिक मदद दी।

*  2024 – पूरा सप्ताह सड़क किनारे रहने वाले लोगों के बीच बिताया, उन्हें मिठाई, कपड़े और कंबल वितरित किए।

*  2025 – इस वर्ष गाजियाबाद स्थित वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की सेवा, उनके साथ समय बिताकर और बड़े स्तर पर अनुदान देकर अपना जन्मदिन समर्पित किया।

गरीबों की बुलंद आवाज

​दीपक सारस्वत का मानना है कि ईश्वर ने हमें जो कुछ भी दिया है, उसका एक अंश समाज के उन लोगों के पास जाना चाहिए जिन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इसी सोच के कारण आज वे गरीबों और जरूरतमंदों की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं।

प्रेरणा का स्रोत बना व्यक्तित्व

​सिनेमा की दुनिया में सक्रिय रहते हुए भी दीपक ने कभी अपनी जड़ों को नहीं भुलाया। उनके इस निरंतर प्रयास ने न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों को प्रेरित किया है। उनके जन्मदिन पर होने वाले ये सेवा कार्य अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुके हैं।

​”दीपक सारस्वत का यह निस्वार्थ सेवा भाव यह सिखाता है कि उत्सव का असली आनंद दूसरों के दुख दूर करने में ही निहित है।”

 

दीपक सारस्वत: समाज सेवा की मिसाल, फिल्मों के साथ-साथ संवार रहे हैं जरूरतमंदों की तकदीर

कटनी के निर्माता विकास शर्मा का पूरा हुआ ख्वाब मल्टीप्लेक्स में छा गया है “अपना अमिताभ”

कटनी (मध्यप्रदेश) के विकास शर्मा की बहुप्रतीक्षित इच्छा पूर्ण हो गई है। अपने गृह नगर से मायानगरी मुंबई तक आने का उनका सफर सफल रहा है और देखा सोचा बुना हुआ सपना साकार हो गया है। आज की तिथि में एक सफल उदीयमान फिल्म प्रोड्यूसर की सूची में विकास शर्मा का नाम शुमार हो गया है। शर्मा के प्रोडक्शन हाउस क्लासिक एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी पहली फिल्म “अपना अमिताभ” इस १२ दिसम्बर, २०२५ से सिनेमाघरों में प्रदर्शित है। इस सोशल ड्रामा के लेखक एवं निर्देशक अजय आनंद हैं। फिल्म गांव के किशोरों के जीवन संघर्ष पर आधारित है। एक सफाईकर्मी का लड़का किस तरह पास पड़ोस के लोगों के ताने विरोध को सीने से लगाए अपनी स्थिति सुदृढ़ करता है, इसे एक ग्रामीण पृष्ठभूमि में रखते हुए बड़े सलीके से दिखाया गया है। एक दिन वही लड़का उनका प्रेरणास्रोत बनता है, यह कहानी का मुख्य बिन्दु है। अजय आनंद के सुलझे निर्देशन में चित्रित “अपना अमिताभ” देखने लायक है। फिल्म गांवों में व्याप्त जाति प्रथा और ऊॅंच नीच जैसी कुव्यवस्था पर चोट करती है।

फिल्मों का शौकीन विजय इस फिल्म का नायक है। वह अमिताभ बच्चन का बहुत बड़ा फैन है। उसकी दिनचर्या की शुरुआत ही अमिताभ बच्चन की फिल्मी स्टाइल से शुरु होती है। उठना बैठना, चलना फिरना सब अमिताभ शैली में होने लगता है। उसकी यह चपलता ग्रामीणों को खलती है। उसे तरह तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। विजय इस उलाहना को हथियार बना लेता है। फिर जो होता है उसके लिए थियेटर पहुंचें और देखें “अपना अमिताभ”।

“अपना अमिताभ” के मुख्य कलाकार हैं : विजय रावल, अंजलि मिश्रा, जय ठक्कर, हेमंत महाउर, मुकेश भट, बच्चन पचेरा, शरत सोनू, सुरुचि वर्मा, हनुमान गुदसा, जीतेन्द्र सिंह, अमित घोष, शिल्पी कुकराती, विनय अम्बष्ट, ज्योत सिंह और अनुपम श्याम। को- प्रोड्यूसर रमेश शर्मा, एडिटर चैतन्य वी. तन्ना, सिनेमैटोग्राफर शम्भु शर्मा, बैकग्राउंड स्कोर भूपेश शर्मा और संगीत निर्देशन राजेश झा का है। अभी कटनी के विकास शर्मा और मुंबई के अजय आनंद “अपना अमिताभ” के निर्माता व निर्देशक के रूप में चर्चा में हैं।

——-  उमेश सिंह चंदेल

कटनी के निर्माता विकास शर्मा का पूरा हुआ ख्वाब मल्टीप्लेक्स में छा गया है “अपना अमिताभ”

Anand Pandey Industrialist–Philanthropist Creates History An Inspiring Journey From Zero To Zenith

From Kunda–Pratapgarh to Mumbai — a journey that inspires the nation

Pratapgarh / Mumbai. : Industrialist and philanthropist Anand Pandey, born in Paranoopur village of Kunda in Uttar Pradesh, recently rose to the national spotlight. The grand Ramkatha Mahotsav held in Pratapgarh from 10 October to 19 October created a chapter in history that will be remembered not only in Pratapgarh but across the state.

The sacred presence of renowned storyteller Rajan Ji Maharaj and the gathering of lakhs of devotees turned Pratapgarh into a place of divine celebration.

For the first time, flowers were showered from a helicopter at the Ramkatha venue, creating an unforgettable atmosphere of devotion, emotion, and spiritual energy. Anand Pandey, the driving force behind the event, remained the central figure of attention throughout the ten-day celebration.

With his humble nature, polite speech, and spiritual inclination, Anand Pandey proved that honesty and determination can take a person to any height.

From a ₹7,000 job in Mumbai to becoming a business tycoon

Anand Pandey’s journey is a remarkable blend of struggle, faith, and success.

In 2011–12, he reached Mumbai in search of employment and began his life with a monthly salary of only ₹7,000–₹8,000.

Within a few years, a dream began to take shape —

“Build your own business, create your own company… and uplift others along the way.”

With this vision, he laid the foundation of his own enterprise in 2018–19. Backed by integrity, hard work, and strong family values, Anand Pandey built a business empire that today stands as an inspiration in both industry and social service.

Away from politics — committed to service

Many assumed that Anand Pandey might enter politics in the future, but he clearly denied such possibilities. His belief is —

 “Serving humanity is serving God.”

Today, he is deeply involved in social initiatives such as marriages of underprivileged girls, educational assistance, medical support for the needy, and community welfare activities.

From poverty to the peak of success

Anand’s life represents the true spirit of struggle.

His father once worked as a security guard and drove an auto-rickshaw. Anand himself prepared for police recruitment exams before destiny redirected his path to Mumbai.

Blessings from his parents, commitment to work, simplicity, and truthfulness transformed his life.

Today, Anand Pandey stands as a role model for youth. From Kunda to Mumbai — his name is identified with perseverance, effort, and achievement.

Message to the youth

“No work is small. Hard work and honesty can take you from zero to the top.”

A confluence of faith, service, and success

Anand Pandey is among the rare individuals who prioritized social contribution along with financial growth.

The Ramkatha Mahotsav he organized will remain a milestone in the history of Pratapgarh — an example of devotion, vision, and remarkable management.

Not only Pratapgarh, but all of Uttar Pradesh and the business community of Mumbai view his journey as a story of extraordinary success and the triumph of human values.

   

Anand Pandey Industrialist–Philanthropist Creates History An Inspiring Journey From Zero To Zenith

Join In Paying Homage At The Memorial Ceremony Of Late Mother Of Sanghmitra Gaikwad

Mumbai / Pune: The revered mother of Sangmitra Gaikwad, State Secretary of RPI (Athawale Group), Maharashtra, passed away on 4th November at Wakad, Pune, leaving behind a legacy of love, strength, and inspiration.

In her fond memory, a memorial prayer ceremony (Punyānummodan) has been organized on 16th November at her residence in Turori, Taluka Udgir, District Dharashiv.

On this solemn occasion, family members, relatives, social workers, and political associates will gather together to pray for the peace of the departed soul.

All well-wishers — Parvati Abhimanyu Belamkar, Shakti Gupta, Tulshiram Shil Ratna Gaikwad, Sangmitra Tai Shripati Gaikwad, Satyashil Tulshiram Gaikwad, Mayadevi Mahesh Kate, Vaishali Jaydev Randive, along with all relatives, supporters, and social companions — are humbly requested to attend the ceremony and offer their heartfelt tributes to the departed soul, and extend their support to the bereaved family in this hour of grief.

Late Bhama Bai Tulshiram Gaikwad led a life of courage and determination. Nearly 40 years ago, after the demise of her husband Tulshiram Gaikwad, she refused to surrender to circumstances.

With immense perseverance, she raised and educated her four daughters and three sons, nurturing them with strong values and discipline. Today, their entire family of seven siblings stands as a shining example of an educated, value-driven, and progressive household.

Among the family members are MDs, doctors, engineers, lawyers, M.Tech and MBA professionals, entrepreneurs, and teachers.

Many have pursued higher education in Egypt, England, Chapra (Bihar), and various parts of India, bringing pride to the family.

The extended family also includes principals, former corporators, supervisors from Kirloskar Company, PTA members, journalists, and socially active individuals.

Their sons-in-law and daughters are also highly educated and actively engaged in social service.

The life and legacy of Bhama Bai Gaikwad remain a living example of resilience, sacrifice, and the power of education and values passed through generations.

May Lord Gautam Buddha bless the departed soul with eternal peace and grant strength to the family to overcome this sorrow.

Namo Buddhay * Jai Bhim *

Join In Paying Homage At The Memorial Ceremony Of Late Mother Of Sanghmitra Gaikwad

Governor Of Chhattisgarh H.E. Ramen Deka Plants Sapling At AAFT University During Convocation 2025

Raipur, Chhattisgarh — November 2025: The Convocation 2025 of AAFT University of Media and Arts, Raipur, became a memorable and historic occasion with the distinguished presence of His Excellency Ramen Deka, Governor of Chhattisgarh, who graced the ceremony and planted a sapling in the university campus, symbolizing growth, knowledge, and sustainability.

The Governor was joined by Shri Tankram Verma, Hon’ble Minister for Higher Education and Disaster Management, Government of Chhattisgarh; Padma Shri Anuj Sharma, Hon’ble MLA; and Shri Vijay K. Goyal, Chairman, Chhattisgarh Private Universities Regulatory Commission. The ceremony was led by Dr. Sandeep Marwah, Chancellor of AAFT University.

Dr. Marwah expressed deep gratitude and said, “The installation of a plant by the Hon’ble Governor marks a new beginning — a symbol of our collective commitment to education, environment, and excellence. AAFT University continues to rise as a hub of creativity, innovation, and holistic learning.”

Addressing the gathering, H.E. Ramen Deka appreciated the vision and contribution of AAFT University towards skill-based education and youth empowerment. He remarked, “Planting a tree is planting hope for the future. I am delighted to see an institution like AAFT University nurturing both talent and social responsibility. Such initiatives reflect the true spirit of nation-building.”

The event was attended by faculty members, graduating students, dignitaries, and guests from various walks of life. The Convocation 2025 concluded with renewed enthusiasm and commitment to knowledge, creativity, and sustainable development.

Governor Of Chhattisgarh H.E. Ramen Deka Plants Sapling At AAFT University During Convocation 2025

“जहाँ समुंद्र मंथन की कहानियाँ खत्म होती हैं, HALLA वहीं से शुरू होता है…”

भारतीय पौराणिक कथाओं की समृद्ध विरासत को एक नए दृष्टिकोण से पेश करता है—HALLA: Antasyah Aarambhah। यह फिल्म न केवल हमारी प्राचीन कथाओं को जीवंत करती है, बल्कि उसे आज के दर्शकों से जोड़ती भी है। इस फिल्म का विचार एक अनोखे सवाल से शुरू हुआ: “अगर समुंद्र मंथन में एक भूला हुआ नायक होता तो?” इसी विचार ने जन्म दिया HALLA को—एक ऐसे नायक की कहानी जिसे विष से जीवन मिला, और जिसने अंधकार से आशा का दीप जलाया।

HALLA, समुंद्र मंथन पर आधारित है, लेकिन यह पारंपरिक कथाओं से बिलकुल अलग है। इस बार कहानी केवल देवताओं और असुरों की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फिल्म उस चक्रव्यूह को दर्शाती है जहाँ भावनाएँ, राजनीति और व्यक्तिगत संघर्ष भी मंथन का हिस्सा हैं। फिल्म में कई नए किरदारों और मानवीय संवेदनाओं को जोड़ा गया है, जिससे यह कथा पहले से कहीं अधिक गहराई और समकालीनता से भर जाती है।

फिल्म का केंद्रीय पात्र, HALLA, विष से उत्पन्न हुआ एक बालक है। यह प्रतीक है उस परिवर्तन का, जहाँ पीड़ा और अंधकार से रक्षक जन्म लेते हैं। यह कहानी बताती है कि हर अंत में एक नई शुरुआत छिपी होती है—और हर विष में एक अमृत का बीज।

HALLA को विशेष बनाता है इसका अनोखा संतुलन—भव्यता और भावनात्मक सच्चाई का मेल। फिल्म की टीम ने विस्तृत सेट्स, व्यावहारिक इफेक्ट्स और अत्याधुनिक VFX तकनीकों का सहारा लेकर एक ऐसा संसार रचा है, जो दर्शकों को एक नए मिथकीय ब्रह्मांड में ले जाता है। लेकिन इसके साथ ही, कहानी में वह मानवीय संवेदना भी बनी रहती है, जिससे दर्शक नायक की यात्रा से गहराई से जुड़ जाते हैं।

फिल्म की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए टीम ने वेदों, पुराणों, लोककथाओं और क्षेत्रीय मिथकों का गहन अध्ययन किया। लेकिन सिर्फ प्राचीनता नहीं, इसमें रचनात्मक कल्पना का भी समावेश है, जिससे HALLA एक अनूठा अनुभव बन जाता है—न तो पूरी तरह पारंपरिक, न ही पूरी तरह आधुनिक, बल्कि दोनों का संतुलन।

HALLA की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आज के दर्शकों से जुड़ती है। पारंपरिक परिधान, डिज़ाइंस और अनुष्ठानों को बनाए रखते हुए, फिल्म की कहानी में आधुनिक गति, गहराई और संघर्ष को जोड़ा गया है। HALLA की यात्रा यह दिखाती है कि पहचान सिर्फ जन्म से नहीं, बल्कि हमारे द्वारा लिए गए निर्णयों से बनती है।

इस भव्य पौराणिक फिल्म के निर्माता और इसकी संकल्पना के सूत्रधार हैं मनोज महेश्वर, जिनका सिनेमा के प्रति समर्पण इसे एक प्रामाणिक और गहन दृष्टि देता है। निर्देशन की कमान संभाली है भास्कर राम ने, जो बहुचर्चित फ़िल्म “बाहुबली” के एसोसिएट तकनीकी डायरेक्टर होने के साथ साथ, कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म की मूल कहानी को रूप दिया है युवा लेखक सौरभ मिश्रा ने, जिन्होंने समुंद्र मंथन की पृष्ठभूमि में एक नई कल्पनाशक्ति का संचार किया है। फिल्म के निर्माण में सशक्त भागीदारी निभाई है बॉलीवुड के अनुभवी निर्माता सुरज सिंह मास ने, जिन्होंने अमिताभ बच्चन और धोनी के साथ हाल ही में ऐड फ़िल्म का निर्माण किया है ।जबकि सह-निर्माता के रूप में अभिषेक राज और रुद्रांश ने फिल्म की रचनात्मक और प्रोडक्शन प्रक्रिया को मजबूती दी है।

तकनीकी दृष्टि से फिल्म को बेजोड़ बनाने में योगदान दिया है साउथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुशल तकनीकी विशेषज्ञ रंजीत ने, और छायांकन की कमान संभाली है रंजीत मोगुसानी ने, जिनकी कैमरा दृष्टि ने इस पौराणिक गाथा को जीवंत बना दिया है। फिल्म के दृश्य संसार को भव्य और प्रभावशाली बनाने में प्रोडक्शन डिज़ाइनर रामकृष्ण की कल्पनाशक्ति और अनुभव झलकता है। सहलेखन में दिलीप केशव का सहयोग इस कथा को भावनात्मक और बौद्धिक गहराई प्रदान करता है।

निर्माता टीम का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दर्शकों को प्रेरणा देना भी है। HALLA दर्शकों को साहस, आत्म-खोज, और आशा का संदेश देता है—यह दिखाता है कि अंधकार के भीतर भी एक रक्षक जन्म ले सकता है। हर विष के भीतर एक वरदान छिपा होता है, और हर संघर्ष में एक नई राह।

यह सिर्फ एक पौराणिक फिल्म नहीं, बल्कि एक कालजयी यात्रा है, जो भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।

क्या आप तैयार हैं इस नई गाथा का हिस्सा बनने के लिए?

“जहाँ समुंद्र मंथन की कहानियाँ खत्म होती हैं, HALLA वहीं से शुरू होता है…”

“जहाँ समुंद्र मंथन की कहानियाँ खत्म होती हैं, HALLA वहीं से शुरू होता है…”

भारतीय पौराणिक कथाओं की समृद्ध विरासत को एक नए दृष्टिकोण से पेश करता है—HALLA: Antasyah Aarambhah। यह फिल्म न केवल हमारी प्राचीन कथाओं को जीवंत करती है, बल्कि उसे आज के दर्शकों से जोड़ती भी है। इस फिल्म का विचार एक अनोखे सवाल से शुरू हुआ: “अगर समुंद्र मंथन में एक भूला हुआ नायक होता तो?” इसी विचार ने जन्म दिया HALLA को—एक ऐसे नायक की कहानी जिसे विष से जीवन मिला, और जिसने अंधकार से आशा का दीप जलाया।

HALLA, समुंद्र मंथन पर आधारित है, लेकिन यह पारंपरिक कथाओं से बिलकुल अलग है। इस बार कहानी केवल देवताओं और असुरों की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फिल्म उस चक्रव्यूह को दर्शाती है जहाँ भावनाएँ, राजनीति और व्यक्तिगत संघर्ष भी मंथन का हिस्सा हैं। फिल्म में कई नए किरदारों और मानवीय संवेदनाओं को जोड़ा गया है, जिससे यह कथा पहले से कहीं अधिक गहराई और समकालीनता से भर जाती है।

फिल्म का केंद्रीय पात्र, HALLA, विष से उत्पन्न हुआ एक बालक है। यह प्रतीक है उस परिवर्तन का, जहाँ पीड़ा और अंधकार से रक्षक जन्म लेते हैं। यह कहानी बताती है कि हर अंत में एक नई शुरुआत छिपी होती है—और हर विष में एक अमृत का बीज।

HALLA को विशेष बनाता है इसका अनोखा संतुलन—भव्यता और भावनात्मक सच्चाई का मेल। फिल्म की टीम ने विस्तृत सेट्स, व्यावहारिक इफेक्ट्स और अत्याधुनिक VFX तकनीकों का सहारा लेकर एक ऐसा संसार रचा है, जो दर्शकों को एक नए मिथकीय ब्रह्मांड में ले जाता है। लेकिन इसके साथ ही, कहानी में वह मानवीय संवेदना भी बनी रहती है, जिससे दर्शक नायक की यात्रा से गहराई से जुड़ जाते हैं।

फिल्म की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए टीम ने वेदों, पुराणों, लोककथाओं और क्षेत्रीय मिथकों का गहन अध्ययन किया। लेकिन सिर्फ प्राचीनता नहीं, इसमें रचनात्मक कल्पना का भी समावेश है, जिससे HALLA एक अनूठा अनुभव बन जाता है—न तो पूरी तरह पारंपरिक, न ही पूरी तरह आधुनिक, बल्कि दोनों का संतुलन।

HALLA की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आज के दर्शकों से जुड़ती है। पारंपरिक परिधान, डिज़ाइंस और अनुष्ठानों को बनाए रखते हुए, फिल्म की कहानी में आधुनिक गति, गहराई और संघर्ष को जोड़ा गया है। HALLA की यात्रा यह दिखाती है कि पहचान सिर्फ जन्म से नहीं, बल्कि हमारे द्वारा लिए गए निर्णयों से बनती है।

इस भव्य पौराणिक फिल्म के निर्माता और इसकी संकल्पना के सूत्रधार हैं मनोज महेश्वर, जिनका सिनेमा के प्रति समर्पण इसे एक प्रामाणिक और गहन दृष्टि देता है। निर्देशन की कमान संभाली है भास्कर राम ने, जो बहुचर्चित फ़िल्म “बाहुबली” के एसोसिएट तकनीकी डायरेक्टर होने के साथ साथ, कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म की मूल कहानी को रूप दिया है युवा लेखक सौरभ मिश्रा ने, जिन्होंने समुंद्र मंथन की पृष्ठभूमि में एक नई कल्पनाशक्ति का संचार किया है। फिल्म के निर्माण में सशक्त भागीदारी निभाई है बॉलीवुड के अनुभवी निर्माता सुरज सिंह मास ने, जिन्होंने अमिताभ बच्चन और धोनी के साथ हाल ही में ऐड फ़िल्म का निर्माण किया है ।जबकि सह-निर्माता के रूप में अभिषेक राज और रुद्रांश ने फिल्म की रचनात्मक और प्रोडक्शन प्रक्रिया को मजबूती दी है।

तकनीकी दृष्टि से फिल्म को बेजोड़ बनाने में योगदान दिया है साउथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुशल तकनीकी विशेषज्ञ रंजीत ने, और छायांकन की कमान संभाली है रंजीत मोगुसानी ने, जिनकी कैमरा दृष्टि ने इस पौराणिक गाथा को जीवंत बना दिया है। फिल्म के दृश्य संसार को भव्य और प्रभावशाली बनाने में प्रोडक्शन डिज़ाइनर रामकृष्ण की कल्पनाशक्ति और अनुभव झलकता है। सहलेखन में दिलीप केशव का सहयोग इस कथा को भावनात्मक और बौद्धिक गहराई प्रदान करता है।

निर्माता टीम का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दर्शकों को प्रेरणा देना भी है। HALLA दर्शकों को साहस, आत्म-खोज, और आशा का संदेश देता है—यह दिखाता है कि अंधकार के भीतर भी एक रक्षक जन्म ले सकता है। हर विष के भीतर एक वरदान छिपा होता है, और हर संघर्ष में एक नई राह।

यह सिर्फ एक पौराणिक फिल्म नहीं, बल्कि एक कालजयी यात्रा है, जो भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।

क्या आप तैयार हैं इस नई गाथा का हिस्सा बनने के लिए?

“जहाँ समुंद्र मंथन की कहानियाँ खत्म होती हैं, HALLA वहीं से शुरू होता है…”

नंदकिशोर धकिते निर्मित,अल्ताफ शेख दिग्दर्शित ‘ऍट पोस्ट बिहाली’ सिनेमा प्रदर्शनाच्या वाटेवर.

बीएसएफ बहुउद्देशीय संस्था,उपेक्षित नायक न्युज,संत कबीर बहुउद्देशीय सामाजिक संस्था बुलढाणा यांच्या वतीने यश पॅलेस अमरावती येथे ‘समाज क्रांती’ पुरस्कार समारंभ आयोजित करण्यात आला होता.यावेळी वर्ल्ड रेकॉर्ड बुक आणि गिनिज बुक रेकॉर्ड विजेते लेखक दिग्दर्शक अल्ताफ दादासाहेब शेख दिग्दर्शित व स्मिता धकिते आणि नंदकिशोर धकिते निर्मित ‘ऍट पोस्ट बिहाली’ या सिनेमाचे पोस्टर प्रदर्शन करण्यात आले.लवकरच हिंदी आणि मराठी भाषेतून संपूर्ण जगभरात सिनेमा प्रदर्शित करण्यात येणार आहे.

फिल्म इंडस्ट्री तसेच मीडिया आणि सामाजिक क्षेत्रातील मान्यवरांना ‘समाज क्रांती’ पुरस्कार देऊन सन्मानित करण्यात आले.याप्रसंगी सिनेमाचे एक्झिक्युटिव्ह प्रोड्युसर विशाल धेंडे,प्रॉडक्शन मॅनेजर गणेश गोरे तसेच सिनेमा सृष्टीतील दिग्दर्शक,निर्माते,कलावंत,पत्रकार इत्यादी क्षेत्रातील मान्यवर मोठ्या संखेने उपस्थित होते.

भुषण सरदार,रॉयल सरदार यांनी विशेष प्रयत्न केले.कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन अश्विनी सांगळे यांनी केले.तर आभार प्रदर्शन दिग्दर्शक अल्ताफ दादासाहेब शेख यांनी केले.

नंदकिशोर धकिते निर्मित,अल्ताफ शेख दिग्दर्शित ‘ऍट पोस्ट बिहाली’ सिनेमा प्रदर्शनाच्या वाटेवर.