अल्ट्राटेक व मीडिया मर्चेंट का सराहनीय पहल, पटना में छठ पूजा के बाद घाटों पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत

चार दिवसीय छठ महापर्व के समापन के बाद बुधवार को सुबह राजधानी पटना के दीघा घाट से सफाई अभियान की शुरुआत की गई। सोमवार रात और मंगलवार तड़के लाखों श्रद्धालुओं ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रत पूर्ण किया। छठ महापर्व पर गंगा घाट किनारे आस्था का सैलाब उमड़ता है और जाहिर सी बात है महापूजा के श्रद्धा भाव से मनाए जाने के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा पूजा सामग्री जल में या घाट के किनारे ही भूलवश छोड़ दी जाती है जाहिर सी बात है छोड़ दी गयी सामग्रियों से कुछ दिनों बाद बदबू व गंदगी फैल जाती है। जिससे निबटने के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट व मीडिया मर्चेंट ने साझा व सराहनीय कदम उठाया व पटना के घाटों पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत कर दी है। पटना के दीघा घाट पर  इस अभियान की सफल शुरुआत की गई है जो आगे भी जारी रहेगी। छठ महापर्व के अगले ही दिन बुधवार को सैकड़ो युवाओ के सहयोग के साथ टीमें घाटों की सफाई में जुट गईं।

सफाई टीम सुबह से ही घाटों पर पहुंचकर पूजा सामग्री, केले के पत्ते, दीपक और अन्य अवशेषों को एकत्रित कर रही थीं। मीडिया मर्चेंट के प्रतिनिधि ज्ञान रंजन ने बताया कि अपने सहयोगियों को पहले से ही सतर्क रखा गया था ताकि त्योहार के अगले ही दिन सफाई कार्य शुरू किया जा सके।

ज्ञान रंजन ने आगे कहा कि हम समय – समय पर ऐसे सामाजिक कार्यों का आयोजन करते रहते हैं। आज हमारे इस स्वच्छता अभियान में देश के नंबर 1 सीमेंट ब्रांड अल्ट्राटेक सीमेंट का हमें साथ मिला व उनके सहयोग एवं संयुक्त प्रयासों से हमने छठ घाटों की सफाई की। हमारा मानना है कि हमें अपनी नदियों और उनके किनारों को हमेशा स्वच्छ और सुन्दर रखना है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि पूजा या धार्मिक आयोजनों के बाद कचरे को गंगा में न डालें, बल्कि निर्धारित कूड़ेदानों में फेंकें। छठ घाटों की सफाई केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है। स्वच्छता ही श्रद्धा का सबसे बड़ा रूप है और बिहारवासी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

अल्ट्राटेक व मीडिया मर्चेंट का सराहनीय पहल, पटना में छठ पूजा के बाद घाटों पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत

Hridaynath Mangeshkar Honours Legacy Of Love & Reverence On Entering His Glorious 89th Year With Didi Aani Mee

The lights dimmed at Pandit Deenanath Mangeshkar Sabhagruha, but silence came first — not the silence of emptiness, but the silence before prayer. Didi Aani Mee was not a concert; it felt like a return to a home built of notes and memory. It honoured Bharat Ratna Lata Mangeshkar and heralded the 89th birthday of Bhav Gandharva Pandit Hridaynath Mangeshkar — the younger brother who still speaks of her as an elder, a mentor, a divine force.

The Mangeshkar family —  Hridaynath Mangeshkar, Bharati Mangeshkar, Usha Mangeshkar, Meena Mangeshkar,  Adinath Mangeshkar — were present as guardians of an inheritance crafted by discipline, humility and sacred silences. Hon. Ashish Shelar, Dr. Anil Kakodkar, Swami Janmejayraje Vijaysinhraje Bhosale Maharaj of Akkalkot, Gautam Thakur, and artistes Roopkumar and Sonali Rathod were present — not merely as guests, but as witnesses to history breathing gently on stage.

When Hridaynath ji spoke, his words felt like a prayer whispered to his sister. “For us, Didi was the commander — the Senapati. We are only her soldiers. We simply follow the path she created. Her discipline, her dignity and her devotion to music still guide me every day.” The hall did not applaud; it absorbed.

Ashish Shelar shared stories the nation rarely heard — of Lata Didi speaking at Prabhu Kunj during photographer Mohan Bane’s book launch, describing cricket with such precision that even seasoned sportsmen were left astonished. And how, in this very auditorium, she once discussed ancient composers and India’s musical history with Hon. Home Minister Amit Shah — with such clarity that even time stood still to listen. “Her voice was immortal,” he said, “but so was her mind.”

Then came a moment of quiet grace. Swami Janmejayraje Vijaysinhraje Bhosale Maharaj, head of the royal house of Akkalkot, rose and said softly, “To be present here today is a blessing. To receive the affection and ashirwad of such an illustrious family like the Mangeshkars is my honour.” It was not a blessing offered — it was respect returned.

And then, legacy became commitment. In honour of Hridaynath Mangeshkar’s birthday, the Master Deenanath Mangeshkar Smruti Pratishthan made an announcement from the stage. They spoke of how the Trust was founded in 1988 by the Mangeshkar family to preserve the memory of Master Deenanath Mangeshkar and to organise his annual remembrance ceremony on 24 April — a tradition upheld continuously for 36 years. On that day, stalwarts from various fields are honoured, and music flows as prayer. The Trust has honoured over 225 personalities so far and supported many artists in need.

Since 2022, the Trust has also been bestowing the Lata Deenanath Mangeshkar Award to individuals who have made unparalleled contributions to India. The recipients so far — Hon. Prime Minister Narendra Modi, Asha Bhosle, Amitabh Bachchan and Kumar Mangalam Birla — reflect the magnitude of this honour.

Ravindra Joshi, Trustee of the Pratishtaan, further announced that every 28 September, Lata Didi’s birthday, a special musical programme is held in Pune, where young artists are blessed by Pandit Hridaynath Mangeshkar. The programme has become a tradition — complete with music, memories, and a meal prepared with Lata Didi’s favourite dishes. To ensure that this legacy continues forever, the Trust declared the creation of a separate permanent fund. All income generated from this fund will be dedicated exclusively to organising this annual programme. A committee — Hridaynath Mangeshkar, Bharati Mangeshkar, Usha Mangeshkar,  Adinath Mangeshkar, Swami Janmejayraje Vijaysinhraje Bhosale Maharaj, Ravindra Joshi, Shirish Rairikar, and Nischal Latad will oversee it. And as the first offering, Hridaynath Mangeshkar himself announced a contribution of ₹25 lakh. Contributions from well-wishers were welcomed with grace. The Trust remains a registered public charitable institution in Pune, eligible for income tax exemptions on donations.

The evening ended not with applause, but with folded hands, moist eyes and quiet reverence. Because some lives do not end — they become the air left behind after music stops.

 

Hridaynath Mangeshkar Honours  Legacy Of Love & Reverence  On  Entering His Glorious 89th Year With Didi Aani Mee

दिदी आनी मी – संगीत, स्मृति और सम्मान की मधुर संध्या, जहां पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने अपने 89वें वर्ष की शुरुआत पर भारत रत्न लता मंगेशकर के प्रति प्रेम और कृतज्ञता को प्रणाम किया

मुंबई के पंडित दीनानाथ मंगेशकर सभागृह में जब रोशनी धीमी हुई, तो सबसे पहले शांति उतरी — वह शांति जो आरती से पहले होती है, स्मरण से पहले होती है। ‘दिदी आनी मी’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह स्वर और स्मृति से सजे हुए उस घर की वापसी थी, जिसका नाम है — लता मंगेशकर। इसी भावनाओं से भरे वातावरण में पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने अपने जीवन के 89वें वर्ष में प्रवेश किया — वही ह्रदयनाथ जी, जो आज भी अपनी बहन को आदर से “दिदी” कहकर याद करते हैं।

मंच पर मंगेशकर परिवार की उपस्थिति स्वयं विरासत की प्रतीक थी — पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आदिनाथ मंगेशकर। इनके साथ माननीय अशिष शेलार, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर, अक्कलकोट राजघराने के स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज, सारस्वत बैंक के सीएमडी गौतम ठाकुर तथा कलाकार रूपकुमार और सोनाली राठौड़ भी इस संध्या के साक्षी बने।

जब पंडित ह्रदयनाथ जी ने मंच संभाला, तो उनके शब्द प्रार्थना की तरह लगे। उन्होंने कहा — “हम सबके लिए दिदी सेनापति थीं। हम तो बस उनके सैनिक हैं। उन्होंने जो राह दिखाई, हम केवल उसी पर चल रहे हैं। उनकी अनुशासन, उनकी मर्यादा और संगीत के प्रति उनका समर्पण आज भी मेरा मार्गदर्शन करता है।” पूरा सभागार उनकी भावनाओं के साथ स्थिर हो गया।

माननीय अशिष शेलार ने लता दीदी की बुद्धिमत्ता और गहराई को याद करते हुए बताया कि प्रभुकुंज में फोटोग्राफर मोहन बाणे की पुस्तक के विमोचन के समय उन्होंने क्रिकेट पर ऐसी सटीक समझ के साथ बात की कि सब दंग रह गए। और कैसे इसी सभागार में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ संगीतकारों और भारतीय संगीत इतिहास पर ऐसा गहन संवाद किया कि समय भी ठहरता-सा लगने लगा। उन्होंने कहा — “उनकी आवाज़ अमर थी, लेकिन उनका मस्तिष्क भी उतना ही अद्वितीय था।”

इसी दौरान अक्कलकोट के स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज ने विनम्रता से कहा —“आज यहां उपस्थित होना मेरे लिए आशीर्वाद के समान है। मंगेशकर जैसे महान परिवार का स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त करना मेरे लिए सम्मान है।”उनके यह शब्द आशीर्वाद नहीं, विनम्रता से झुका हुआ मस्तक थे।

इसके बाद स्मृति से संकल्प की ओर बढ़ते हुए मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान ने घोषणा की। बताया गया कि यह ट्रस्ट वर्ष 1988 में मंगेशकर परिवार द्वारा स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य हर वर्ष 24 अप्रैल को मास्टर दीनानाथ जी की पुण्यतिथि पर स्मृति समारोह आयोजित करना है। पिछले 36 वर्षों से यह परंपरा बिना रुके निभाई जा रही है, और अब तक 225 से अधिक विभूतियों को सम्मानित किया जा चुका है।

सन् 2022 से इस प्रतिष्ठान द्वारा ‘लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार’ भी प्रदान किया जा रहा है — जिसके अब तक के प्राप्तकर्ता हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आशा भोसले, अमिताभ बच्चन और कुमाfर मंगलम बिड़ला।

ट्रस्टी रविंद्र जोशी ने घोषणा की कि हर वर्ष 28 सितंबर — लता दीदी का जन्मदिन — पुणे में आयोजित होने वाले इस विशेष संगीत समारोह को सदैव जारी रखने के लिए एक स्थायी निधि (Corpus Fund) बनाई जा रही है। इस निधि से होने वाली आय केवल इस वार्षिक स्मृति कार्यक्रम के लिए उपयोग की जाएगी। इस समिति में पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, आदिनाथ मंगेशकर, स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज, रविंद्र जोशी,a dm शिरीष रैरीकर और निष्कल लताड़ शामिल रहेंगे। इस निधि के प्रारंभ हेतु पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने स्वयं ₹25 लाख का योगदान घोषित किया।

यह प्रतिष्ठान पुणे के चैरिटी कमिश्नर कार्यालय में पंजीकृत है तथा आयकर विभाग द्वारा अनुमोदित है, जिससे दी गई दानराशि पर आयकर में छूट का लाभ मिलता है।

संध्या का समापन तालियों से नहीं, बल्कि भीगी आंखों, जुड़ी हथेलियों और मौन श्रद्धा से हुआ। कुछ आवाज़ें समाप्त नहीं होतीं — वे हवा बनकर हमारे साथ रहती हैं, संगीत रुकने के बाद भी ।

 

दिदी आनी मी – संगीत, स्मृति और सम्मान की मधुर संध्या, जहां पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने अपने 89वें वर्ष की शुरुआत पर भारत रत्न लता मंगेशकर के प्रति प्रेम और कृतज्ञता को प्रणाम किया

‘दिदी आणी मी’ — संगीत, स्मृती आणि स्नेहाचा सोहळा, पं. ह्रदयनाथ मंगेशकर यांनी भारतरत्न लता दीदींच्या प्रेम व परंपरेला दिलेली कृतज्ञ अभिवादनाअंतर्गत त्यांच्या ८९ व्या वर्षात प्रवेशाचा भावपूर्ण उत्सव

पंडित दीनानाथ मंगेशकर सभागृहात दिवे मंदावले आणि पहिल्यांदा शांतता उतरली — रिकामेपणाची नाही, तर प्रार्थनेपूर्वीची. ‘दिदी आणी मी’ हा केवळ एक कार्यक्रम नव्हता; तो सुरांच्या घरात पुन्हा परतण्याचा क्षण होता. हा सोहळा भारतरत्न लता मंगेशकर यांना समर्पित होता आणि त्याच वेळी भाऊगंधर्व पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर यांच्या ८९ व्या वर्षाच्या प्रारंभाचा साक्षीदारदेखील होता — तेच ह्रदयनाथजी, जे आजही त्यांना ‘दिदी’ म्हणूनच स्मरतात — मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत, आणि कृपेचे अधिष्ठान.

ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, मीनाताई मंगेशकर, आदिनाथ मंगेशकर — हे सर्व परिवारातील ज्येष्ठ आणि वारशाचे संरक्षक उपस्थित होते. या क्षणाचे साक्षीदार होते — मा. अशिष शेलार, डॉ. अनिल काकोडकर, अक्कलकोट संस्थानचे महाराज श्री स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले, गौतम ठाकूर, रूपकुमार आणि सोनाली राठोड — पाहुणे म्हणून नव्हे, तर इतिहासाला साक्ष देणारे साक्षीदार म्हणून.

जेव्हा ह्रदयनाथजी बोलायला उठले, त्यांचे शब्द बहिणीला वाहिलेल्या शांत प्रार्थनेसारखे वाटले. त्यांनी सांगितले — “आमच्यासाठी दिदी म्हणजे सेनापती. आम्ही फक्त त्यांचे सैनिक. त्यांनी दाखवलेला मार्गच आम्ही चालत आलो आहोत. त्यांची शिस्त, त्यांची मर्यादा, संगीताशी त्यांचं निष्ठावान नातं — हेच अजूनही आम्हाला मार्ग दाखवतं.” सभागृह थबकलं — टाळ्यांसाठी नव्हे, तर भावनांना मोकळं होण्यासाठी.

यानंतर मा. अशिष शेलार यांनी लतादीदींच्या अलभ्य आठवणी उलगडल्या. प्रभुकुंज येथे छायाचित्रकार मोहन बाणे यांच्या पुस्तक प्रकाशनावेळी लतादीदींनी क्रिकेटचे असे तपशीलवार विश्लेषण केले, की अनुभवी क्रीडापटूही थक्क झाले. आणि याच सभागृहात, एकदा त्यांनी मा. गृहमंत्री अमित शहांसोबत भारतीय संगीताच्या इतिहासावर केलेले सखोल चिंतन — असा शेलारजींनी उल्लेख करत म्हटलं — “त्यांचा आवाज अमर होता, पण त्यांची बुद्धीही तितकीच अद्वितीय होती.”

यानंतर सभागृहात एक राजेशाही शांतता उतरली. अक्कलकोट संस्थानचे स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज अत्यंत नम्रतेने उभे राहिले आणि म्हणाले —“इथे उपस्थित राहणे ही माझ्यासाठी आशीर्वादासारखी अनुभूती आहे. मंगेशकरांसारख्या दिग्गज कुटुंबाकडून स्नेह आणि आशीर्वाद मिळणे — हाच माझा सन्मान आहे.”हे आशीर्वाद नव्हते — हे कृतज्ञतेने झुकलेलं मानवी नम्रतेचं सौंदर्य होतं.

आणि मग वारसा झाला संकल्प.मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृती प्रतिष्ठानतर्फे जाहीर करण्यात आले की — सन १९८८ मध्ये स्थापन झालेल्या या विश्वस्त संस्थेने गेली ३६ वर्षे दि. २४ एप्रिल रोजी मास्टर दीनानाथजींच्या पुण्यतिथीचे स्मरण अत्यंत निष्ठेने साजरे केले आहे. आतापर्यंत २२५ हून अधिक मान्यवरांचा सन्मान झाला आहे आणि अनेक कलावंतांना मदतही करण्यात आली आहे.

सन २०२२ पासून ‘लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार’ही प्रदान केला जात आहे. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी, आशा भोसले, अमिताभ बच्चन आणि कुमार मंगलम बिर्ला हे आजवरचे मानकरी.

रविंद्र जोशी यांनी पुढे सांगितले — की दरवर्षी २८ सप्टेंबरला, पुण्यात लतादीदींच्या जन्मदिनानिमित्त आयोजित होणारा संगीताचा सोहळा अखंडितपणे सुरू राहावा म्हणून एक संकल्पनिधी / कायमस्वरूपी निधी उभारण्यात येत आहे. या निधीवरील व्याजातून या सोहळ्याचे सर्व खर्च उचलले जातील. ह्रदयनाथजींनी स्वतः रु.२५ लाखांची देणगी प्रथम नोंदवली. भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, ह्रदयनाथ मंगेशकर, आदिनाथ मंगेशकर, स्वामी जंजमेयराजे भोसले, रविंद्र जोशी, शिरीष रैरीकर आणि निष्कळ लटाड या समिती सदस्यांच्या देखरेखीखाली हा उपक्रम पार पडेल.

कार्यक्रमाचा शेवट टाळ्यांनी झाला नाही — तर ओलावलेल्या डोळ्यांनी, जपून धरलेल्या शांततेने आणि दुमदुमणाऱ्या भावनेने. काही आवाज थांबत नाहीत. ते विरून जात नाहीत. ते हवेचा श्वास होतात — आणि संगीत थांबल्यानंतरही जगत राहतात.

‘दिदी आणी मी’ — संगीत, स्मृती आणि स्नेहाचा सोहळा, पं. ह्रदयनाथ मंगेशकर यांनी भारतरत्न लता दीदींच्या प्रेम व परंपरेला दिलेली कृतज्ञ अभिवादनाअंतर्गत त्यांच्या ८९ व्या वर्षात प्रवेशाचा भावपूर्ण उत्सव

Actress Karnika Mandal to share screen in Epic Period historical movie ‘‘YANA…? with and Rahul B Kumar

Actress  Karnika Mandal steps into the spotlight as the lead actress of ‘YANA…?, undertaking what the production team describes as a “surprising and challenging role.” Her character reportedly draws from historical figures of the 1840s period, requiring extensive preparation and emotional range.

Karnika Mandal says ” after hearing the narration I am sure this is the my dream film for which I had been waiting for in my film career.”

“Karnika Mandal brings exceptional depth to her portrayal in this biopic,” notes a production insider. “The role demands both physical transformation and psychological immersion into a character from a vastly different era.”

The actress has been spotted at various historical locations during pre-production, studying artifacts and historical documents to better understand the societal context of women in 1840s India. Her dedication to historical accuracy demonstrates the film’s commitment to authentic storytelling despite its genre-bending musical elements.

Under the direction of Mr. Prajapati, ‘YAANA…? takes shape as a multilingual production that will be simultaneously released in Hindi, Telugu, Tamil, Kannada, and Malayalam. This ambitious approach reflects the pan-Indian significance of the historical events portrayed in the film, as well as the production team’s commitment to reaching diverse linguistic audiences across the subcontinent.

 

The multilingual production strategy involves not merely dubbing the film but adapting cultural and linguistic nuances for each regional version, ensuring authentic resonance with varied audiences. Prajapati’s directorial vision encompasses this complexity while maintaining narrative cohesion across all language versions.

Supporting Mr. Prajapati’s creative vision is a team of accomplished professionals, The film’s screenplay and dialogs have been crafted by Pinku Dube and Sonu Dandoria This collaborative approach to storytelling ensures that the historical narrative maintains both factual integrity and dramatic impact.

Composer Dev Chauhan has been tasked with creating a musical landscape that bridges nearly two centuries of musical evolution. His soundtrack for ‘YAANA…? will include traditional compositions authentic to the 1840s setting while also featuring contemporary elements—most notably an English-language song positioned to achieve international appeal.

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Actress Karnika Mandal to share screen in Epic Period historical movie ‘‘YANA…? with and Rahul B Kumar

Ratnakar Kumar Released The Trailer Of Bhojpuri Film UMA Mahi Shrivastava Is Seen Fighting For Her Rights

भोजपुरी सिनेमा के जाने माने फ़िल्म निर्माता रत्नाकर कुमार जब भी किसी फिल्म का निर्माण करते हैं तो वह आम फिल्मों से अलग होती है और समाज को जागरूक करने वाले मैसेज भी देती है। इसी कड़ी में रत्नाकर कुमार ने निर्देशक अनंजय रघुराज निर्देशन में भोजपुरी फिल्म ‘उमा’ का निर्माण करके मिसाल कायम किया है। इस फ़िल्म में केंद्रीय भूमिका में भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री की बेस्ट एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव हैं, जिन्होंने टाइटल रोल निभाया है। वो गाँव की साधारण परिवेश में पली बढ़ी लड़की के रूप में नजर आ रही हैं, जिनका विवाह बाल्यावस्था में ही हो जाता है और मैच्योर होने पर किसी कारणवश तलाक की नौबत आ जाती है। माही श्रीवास्तव कोर्ट में अपने हक की लड़ाई लड़ते हुए नजर आती हैं और गांव समाज में ताने देने वालों का को मुंहतोड़ जवाब भी देती है। इस ट्रेलर में एक्टर रितेश उपाध्याय सिंपल विलेज ब्वॉय के रूप में दिख रहे हैं। जिनका विवाह बचपन में ही माही हुआ था। यह एक फैमिली ड्रामा से भरपूर सम्पूर्ण पारिवारिक फिल्म है। इस फ़िल्म का ट्रेलर देखकर लग रहा है कि देश-विदेश में बहुत सारा अवार्ड जीतने वाली फिल्म जया का रिकॉर्ड तोड़ेगी। जिस प्रकार से जया बनकर माही श्रीवास्तव ने नारी के हक की आवाज उठाकर बेस्ट अभिनेत्री का खिताब हासिल किया है। उसी प्रकार इस फिल्म ‘उमा’ से भी माही श्रीवास्तव सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

उल्लेखनीय है कि फ़िल्म निर्माता रत्नाकर कुमार द्वारा निर्मित की गई, भोजपुरी फिल्म ‘उमा’ महिला प्रधान फिल्म है। जिसका ट्रेलर देखकर फिल्मी गलियारे में चर्चा का विषय बन गई है। जिस तरह से उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर आधारित महिला प्रधान फिल्म ‘जया’ बनाकर भोजपुरी सिनेमा में नया इतिहास रच दिया और ‘जया’ को देश और विदेश में अनगिनत ऐतिहासिक अवार्ड से मिले हैं और अब लगता है कि फिल्म ‘उमा’ भी एक नया इतिहास रचेगी और रत्नाकर कुमार फिर से एक और नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

गौरतलब है कि रत्नाकर कुमार व जितेंद्र गुलाटी प्रस्तुत वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स चैनल के बैनर तले बनी महिला प्रधान भोजपुरी फिल्म ‘उमा’ के निर्माता रत्नाकर कुमार हैं। निर्देशक अनंजय रघुराज हैं। लेखक अरविंद तिवारी और राकेश तिवारी हैं। संगीतकार साजन मिश्रा, गीतकार धरम हिंदुस्तानी, सिंगर कल्पना पाटोवारी, प्रियंका सिंह, सुगम सिंह, किरण कश्यप हैं। डीओपी ​के. वेंकट महेश, कोरियोग्राफर कानू मुखर्जी, आर्ट डायरेक्टर राम दुलारे और मिलिंद सिंह,  ईपी कुलदीप श्रीवास्तव, प्रोडक्शन कंट्रोलर महेश उपाध्याय हैं। इस फिल्म का पीआरओ ब्रजेश मेहर और रामचंद्र यादव हैं। इस फिल्म में मुख्य कलाकार माही श्रीवास्तव, रितेश उपाध्याय, अमरेन्द्र शर्मा, शम्भू राणा, पुष्पेन्द्र राय, नेहा सिंह, अंशू तिवारी, मोना राय, राकेश त्रिपाठी, सी.पी. भट्ट, ऋतम श्री, जेपी सिंह, अंशु तिवारी,⁠ पारुल प्रिया, बबीता सिंह हैं।

इस फ़िल्म को लेकर रत्नाकर कुमार ने कहा कि ‘फिल्म ‘उमा’ सामाजिक मुद्दे पर आधारित एक नारी प्रधान सिनेमा है, जो मनोरंजन के साथ-साथ आम जनता की समस्या को दर्शाती है। इस फ़िल्म के माध्यम से समाज को जागरूक करने का भरसक प्रयास किया गया है। उम्मीद है कि हमारी ये पहल लोगों के बीच सकारात्मक सोच पैदा करेगी और समाज के प्रति लोग अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।

वहीं एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने कहा कि ‘रत्नाकर कुमार सर जब भी कोई फिल्म बनाते हैं तो वो इंटरटेनमेंट के साथ-साथ समाज में मैसेज भी देते हैं। जिस तरह से फ़िल्म जया में उन्होंने सामाजिक मुद्दा उठाया था और मुझे लाइफ में कुछ अलग करने का मौका दिया था, वैसे ही उमा में भी रत्नाकर कुमार सर एक नई लकीर खींच रहे हैं। इसके लिए मैं रत्नाकर कुमार सर को दिल से धन्यवाद देती हूँ।’

इस फिल्म के निर्देशक अनंजय रघुराज ने कहा कि ‘एक निर्माता के तौर पर रत्नाकर कुमार भोजपुरी सिनेमा में नई अलख जागने का काम कर रहे हैं। वे ऐसे फिल्म निर्माता हैं, जो भोजपुरी में सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाते हैं। फ़िल्म ‘उमा’ के निर्देशन की कमान मेरे हाथों में सौंपकर उन्होंने मुझ पर विश्वास जताया है, इसके लिए उन्हें दिल से थैंक्यू।’

भोजपुरी फिल्म ‘उमा’ का ट्रेलर रत्नाकर कुमार ने किया रिलीज, हक की लड़ाई लड़ती नजर आ रही हैं माही श्रीवास्तव

पूनम झावर: ग्लैमरस अदाकारा जिसने बॉलीवुड में बनाई अपनी अलग पहचान

*मुंबई,  :* अपनी सदाबहार खूबसूरती और ग्लैमरस अंदाज़ के लिए मशहूर बॉलीवुड अदाकारा *पूनम झावर* आज भी दर्शकों के दिलों पर राज करती हैं। *14 अगस्त 1978* को मुंबई में जन्मी पूनम, *पूजाश्री झावर* और *तराचंद झावर* की बेटी हैं। वह केवल एक सफल अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि प्रोड्यूसर और इवेंट ऑर्गनाइज़र के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं।

पूनम झावर ने साल *1994 की सुपरहिट फिल्म “मोहरा”* से बॉलीवुड में कदम रखा था। इस फिल्म के सदाबहार गीत “ना कजरे की धार” में उनकी मौजूदगी ने उन्हें रातों-रात पहचान दिलाई। उनकी सुंदरता, शालीनता और स्क्रीन प्रेज़ेन्स ने उन्हें 90 के दशक की सबसे ग्लैमरस अभिनेत्रियों में शुमार कर दिया।

### अभिनय से आगे की यात्रा

जहाँ कई समकालीन अभिनेत्रियाँ समय के साथ फीकी पड़ गईं, वहीं पूनम झावर ने खुद को कई अलग क्षेत्रों में साबित किया। फिल्मों के अलावा उन्होंने *फिल्म प्रोडक्शन और इवेंट मैनेजमेंट* में भी कदम रखा और अपने उद्यमशील स्वभाव का परिचय दिया।

उन्होंने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ क्षेत्रीय फिल्मों में भी काम किया और ऐसे किरदार निभाए जो सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं थे। उनकी मेहनत और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें लंबे समय तक मनोरंजन जगत में सक्रिय बनाए रखा।

### ग्लैमर और आधुनिकता का संगम

आज भी पूनम झावर अपनी खूबसूरती और फैशन सेंस के लिए चर्चा में रहती हैं। उनके हाल के फोटोशूट्स, सोशल मीडिया पोस्ट्स और पब्लिक अपीयरेंस इस बात का सबूत हैं कि उनकी स्टाइल और एलिगेंस का कोई मुकाबला नहीं है। इंस्टाग्राम और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स पर उनकी मजबूत फैन फॉलोइंग है, जहाँ लोग उनके लुक्स और पर्सनालिटी से प्रेरणा लेते हैं।

### आने वाले प्रोजेक्ट्स

इस समय पूनम झावर एक *महिला केंद्रित फिल्म प्रोजेक्ट* पर काम कर रही हैं। यह फिल्म हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में बनाई जा रही है और इसकी शूटिंग राजस्थान और मध्य प्रदेश की खूबसूरत लोकेशन्स पर हो रही है। यह प्रोजेक्ट उनके अभिनय के नए पहलू दर्शकों तक पहुँचाएगा।

इसके अलावा वह एक *इवेंट ऑर्गनाइज़र और पब्लिक पर्सनालिटी* के तौर पर भी लगातार सक्रिय हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, फैशन शो और बॉलीवुड इवेंट्स में अपनी मौजूदगी से चार चाँद लगाती हैं।

### मुख्य जानकारी

* *पूरा नाम:* पूनम झावर

* *जन्म तिथि:* 14 अगस्त 1978

* *जन्म स्थान:* मुंबई, महाराष्ट्र

* *माता का नाम:* पूजाश्री झावर

* *पिता का नाम:* तराचंद झावर

* *पेशा:* अभिनेत्री, प्रोड्यूसर, इवेंट ऑर्गनाइज़र

### स्थायी छाप

ग्लैमर, शालीनता और करिश्माई व्यक्तित्व के साथ *पूनम झावर* ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ 90 के दशक की स्टार नहीं, बल्कि एक बहुमुखी कलाकार हैं, जो समय के साथ खुद को नया रूप देती रहती हैं।

उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि चाहे फिल्मों की चमक हो या मंच की रौनक—पूनम झावर का जादू आज भी दर्शकों को मोहित कर रहा है और आने वाले समय में भी करता रहेगा।

 

पूनम झावर: ग्लैमरस अदाकारा जिसने बॉलीवुड में बनाई अपनी अलग पहचान

फिल्म,’सत्यकथा’ मुहूर्त शॉट संपन्न डायरेक्टर एसपी निम्बावत के निदेशक बन रही फिल्म

“रामविलास कमलादेवी राठी”  फिल्म,सत्यकथा’ ,डायरेक्टर एसपी निम्बावत के निदेशक में बन रही फिल्म एक सत्य कथा पर आधारित है, फिल्म जो कि फिल्म  सूट इंदौर में सूट किये जायेगे, इससे पहले इसके कुछ सीन के सूट राजस्थान के ओसियां में दिखाए फ़िल्माया गया आज इन्दौर स्थित गीता भवन में फिल्म का मुहुर्त सम्पन्न हुआ ।

मुंबई के प्रसिध्द प्रिंस मूवी के  मालिक राकेश सबखाल द्वारा मुहुर्त शार्ट किया गया, जिसमें नवीन जैन वह राजा रघुवंशी मुंबई के सुप्रसिद्ध कलाकार मौजूद रहे दीपम शेवानी , आशीष संवत्सर, इमरान खान , अशोक शर्मा , मुंबई से विजय वर्मा ,, नरेन्द्र जी, राधिका जी, कृतिका जी, गौरव टाक मौजूद रहे! नरेंद चौहान,  प्रोडक्शन हेड हरनेश  गोस्वामी  और  राम  गुज्जर आदि  मौजूद  रहे ।

 

फिल्म,’सत्यकथा’  मुहूर्त शॉट संपन्न डायरेक्टर एसपी निम्बावत के निदेशक बन रही फिल्म

Dr. Krishna Chouhan Presented The Bhagavad Gita On Shri Krishna Janmashtami

Mumbai. Dr. Krishna Chouhan has been gifting the Bhagavad Gita to people on the occasion of Shri Krishna Janmashtami. Producer, director, and social activist, Dr. Krishna Chouhan has been gifting the Bhagavad Gita on Krishna Janmashtami for the past eight years. Known as the “Award King,” Dr. Krishna Chouhan is the Founder and National President of the Krishna Chouhan Foundation (KCF). Dr. Krishna Chauhan successfully organized the Bollywood Legends Film Festival 2024 in Mumbai on August 15th, where numerous Bollywood celebrities were present.

Dr. Krishna Chouhan presented the Bhagavad Gita to several celebrities, including Surendra Pal, Deepak Parashar, Deepa Narayan Jha, Abhishek Khanna, Deepak Desai, Ramesh Goyal, Anupama, Kiran Parmar, singer NK Naresh, Vicky Nagar, and Bheru Jain.

Dr. Krishna Chouhan stated that Krishna Janmashtami holds special significance in Hinduism.  This day marks the birth anniversary of Lord Krishna. I have continued the tradition of gifting the Bhagavad Gita to people on the occasion of Krishna Janmashtami.

He extended his heartfelt greetings to everyone on Krishna Janmashtami and said, “May Lord Krishna shower his blessings upon you all and may you have happiness, peace, and prosperity in your lives.”

 

Dr. Krishna Chouhan Presented The Bhagavad Gita On Shri Krishna Janmashtami

Khesari Lal Yadav, Madhu Sharma, Shweta Mhara’s Bhojpuri Film SHRI 420 Will Release Across India On October 27, Coinciding With Chhath Puja.

भोजपुरी सिनेमा के ग्लोबल स्टार खेसारी लाल यादव इन दिनों चुनावी जंग के मैदान में कूद चुके हैं और उनका समर्थन देने के लिए अथाह लोगों का जनसमूह उनके साथ उमड़ पड़ता है। ऐसे में खेसारी लाल यादव के शानदार अभिनय से सजी बहुचर्चित भोजपुरी फिल्म ‘श्री 420’ छठ पूजा के शुभ अवसर पर 27 अक्टूबर को सिनेमाघरों में भव्य पैमाने पर रिलीज होने वाली है। इस फ़िल्म में केंद्रीय भूमिका में खेसारी लाल यादव, मधु शर्मा और श्वेता महारा की रोमांचक के मिस्ट्री दिखने वाली है। इस फ़िल्म के प्रोड्यूसर मधु शर्मा और समीर अफताब हैं, जिन्होंने फुल एंटरटेनिंग फिल्म का निर्माण किया है। इस फ़िल्म का कुशल निर्देशन मोस्ट टैलेंटेड डायरेक्टर निर्देशक प्रवीण कुमार गुडुरी ने किया है।

सह-निर्माता अंशुमान सिंह हैं। पटकथा एवं संवाद इंद्रजीत कुमार ने लिखा है।

बता दें कि यह फिल्म ‘श्री 420’ शूटिंग के समय से ही सुर्खियों में है। इस फिल्म का ट्रेलर पहले ही एसआरके म्यूजिक पर रिलीज किया जा चुका है, जिसे मिलियन की तादाद में व्यूज मिला है और अब फ़िल्म के रिलीज तारीख का अनाउंसमेंट होने पर खेसारीलाल यादव के फैंस और ऑडियंस में एक्साइटमेंट को दोगुना बढ़ गई है। लोग इस फ़िल्म को देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 24 फ्रेम एंटरटेनमेंट फ़िल्म वितरक कंपनी इस फ़िल्म को पूरे भारत में 27 अक्टूबर को रिलीज कर रही है।

इस फिल्म के रिलीज की जानकारी खेसारी लाल यादव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट करके दिया है!

https://www.instagram.com/p/DPoBTDciPoD/

इस फ़िल्म को लेकर खेसारी लाल यादव ने बताया कि  ‘हमारी फिल्म ‘श्री 420′ कंप्लीट फैमिली ड्रामा एंटरटेनर है, जोकि कॉमेडी, एक्शन, इमोशन, रोमांस, थ्रिल से भरपूर है। ये फ़िल्म छठ पूजा पर रिलीज हो रही है, तो आप लोग अपने-अपने नजदीकी सिनेमाघरों में जाकर फैमिली के साथ फ़िल्म देखिएगा। आप लोग फ़िल्म को सुपरहिट बनाइये और मुझ पर अपना प्यार आशीर्वाद हमेशा बनाये रखें।’

वहीं फिल्म निर्माता समीर आफताब ने कहा कि ’27 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही हमारी फिल्म ‘श्री 420′ में बहुत सालों बाद खेसारी लाल यादव उस रूप में नजर आयेंगे, जिस रूप को लोगों ने बहुत पसंद किया था। यह खेसारी लाल यादव के टाइप की कॉमेडी का तड़का वाली फिल्म बनाई गई है, जो उनकी फैन फ़ॉलोइंग बहुत ज्यादा पसंद करती है, उसको ध्यान में रखकर इस फ़िल्म को निर्माण किया गया है। वादा है कि सभी ऑडियंस को यह फ़िल्म बहुत पसंद आएगी।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘इस फ़िल्म में खेसारी लाल यादव के साथ मधु शर्मा और श्वेता म्हारा अहम भूमिकाओं में दिखेंगी। इस फिल्म में खेसारी लाल यादव एक ठग के भूमिका में नजर आएंगे, जो चतुराई और सुझ-बूझ से अपने मिशन को अंजाम देते हैं।’

गौरतलब है कि मैडज मूवीज बैनर के तले निर्मित की गई बहुप्रतीक्षित भोजपुरी फिल्म ‘श्री 420’ का गीत-संगीत बहुत ही मधुर और कर्णप्रिय बनाया गया है। संगीतकार कृष्णा बेदर्दी ने गीतकार प्यारे लाल यादव, कृष्णा बेदर्दी के लिखे गीतों को मधुर संगीत से सजाया है। डीओपी वासु, एडीटर गुरजंट सिंह, डांस मास्टर संजीव के. शर्मा, लकी विश्वकर्मा, आर्ट डायरेक्टर शेरा, प्रोमो एडीटर उमेश मिश्रा हैं। मुख्य कलाकार खेसारी लाल यादव, मधु शर्मा, श्वेता म्हारा, संजय पांडेय, समर्थ चतुर्वेदी, प्रकाश जैस, श्रद्धा नवल, श्लेषा मिश्रा, निशा गुप्ता, अलीशा शर्मा, उमाकांत राय, राहुल श्रीवास्तव, सोनू पांडेय, चंदन कश्यप, तवी तिवारी, अमन सिंह, कृति तिवारी, दिव्या यादव, सुनीता वर्मा, आयुषी पांडेय, दिव्या सिंह, बेबी सृष्टि हैं। मेहमान भूमिका मनोज सिंह टाइगर, अनूप अरोरा, देव सिंह, सी. पी. भट्ट, रोहित सिंह मटरू, अशोक अत्री, महंतजी हैं।

 

खेसारी लाल यादव और निर्माता समीर आफताब की बहुप्रतीक्षित भोजपुरी फिल्म ‘श्री 420’ छठ पूजा पर 27 अक्टूबर को होगी रिलीज